JPSC-JSSC परीक्षा विवाद: सरकार पर 'लॉलीपॉप' देने का आरोप, छात्रों का विधानसभा मार्च
झारखंड में लोक सेवा आयोग (JPSC) और कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों का विरोध प्रदर्शन सोमवार को और तेज़ हो गया। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक…
झारखंड में लोक सेवा आयोग (JPSC) और कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों का विरोध प्रदर्शन सोमवार को और तेज़ हो गया। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी छात्रों ने विधानसभा के घेराव के लिए मार्च निकाला। इस दौरान, अनशन पर बैठे छात्रों ने सरकार पर 'लॉलीपॉप' देकर गुमराह करने का गंभीर आरोप लगाया।
छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो भी इस विधानसभा मार्च में शामिल हुए। उधर, जयपाल मुंडा स्टेडियम में अनशन कर रहे छात्र नेता प्रेम नायक ने कहा, "सरकार 'लॉलीपॉप' देकर छात्रों को गुमराह कर रही है। अगर छात्रों की बातें मान ली गई हैं तो आप इसे आधिकारिक तौर पर लागू क्यों नहीं कर रहे हैं? मुख्यमंत्री सामने आएं और मीडिया के सामने स्थिति स्पष्ट करें।"
सरकार से सीधी बातचीत की मांग
प्रेम नायक ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को संबोधित करते हुए कहा कि उन्हें छात्रों से बात करनी चाहिए। उन्होंने कहा, "छात्र शुरू से आपसे बात करना चाहते थे... आपको इतना घमंड मत रखिए। अगर जनता बात करना चाहती है, तो उनकी बात सुनिए। जैसे आपके बच्चे होते हैं घर में, वैसे ये भी आपके बच्चे हैं।" उन्होंने यह भी कहा, "यही जनता आपको बनाती है और यही जनता नीचे गिराती है। सड़क पर आ जाएंगे आप।"
बातचीत में प्रगति और अटके हुए मुद्दे
एक अन्य छात्र नेता चंदन कुमार ने बताया कि रविवार को मंत्रियों के साथ दो दिनों तक चली बातचीत में छात्रों की लगभग 80 प्रतिशत मांगों पर सहमति बन गई है। हालांकि, कुछ अहम मुद्दों पर अभी भी सहमति नहीं बन पाई है। सरकार ने आश्वासन दिया है कि मामले की जांच जारी रहेगी और एक रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में समिति बनाई जाएगी। यह भी कहा गया है कि यदि जांच में पैसों के लेनदेन की बात सामने आती है तो ईडी की मदद लेने पर भी विचार किया जाएगा।
बातचीत के दौरान परीक्षा प्रणाली में सुधार और फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाकर 90 दिनों के भीतर रिपोर्ट देने के प्रस्ताव पर भी सहमति बनी है। चंदन कुमार ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन किसी सरकार के खिलाफ नहीं, बल्कि व्यवस्था के खिलाफ है, ताकि हर मेहनती और गरीब छात्र को नौकरी का समान अवसर मिल सके।
इनपुट: IANS



