शुक्रवार, 21 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
उत्तर प्रदेश

मेरठ: किसान नेताओं की हिरासत में पिटाई का आरोप, अखिलेश-चंद्रशेखर ने उठाए सवाल, पुलिस ने किया खंडन

उत्तर प्रदेश के मेरठ में दो किसान नेताओं द्वारा पुलिस हिरासत में बेरहमी से पीटे जाने का आरोप लगाए जाने के बाद सियासत गरमा गई है। समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव से लेकर नगीना के सांसद चंद्रशेखर…

मेरठ: किसान नेताओं की हिरासत में पिटाई का आरोप, अखिलेश-चंद्रशेखर ने उठाए सवाल, पुलिस ने किया खंडन
(फोटो: IANS)

उत्तर प्रदेश के मेरठ में दो किसान नेताओं द्वारा पुलिस हिरासत में बेरहमी से पीटे जाने का आरोप लगाए जाने के बाद सियासत गरमा गई है। समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव से लेकर नगीना के सांसद चंद्रशेखर आजाद तक ने इस घटना पर सवाल उठाते हुए जांच और कार्रवाई की मांग की है। वहीं, मेरठ पुलिस ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें निराधार बताया है।

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मामला भारतीय किसान यूनियन (बीआर आंबेडकर) के अध्यक्ष दिग्विजय सिंह भाटी और उनके साथी मोहित जाटव से जुड़ा है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, भाटी ने एक वीडियो जारी कर आरोप लगाया है कि 19 अगस्त को जब वे एक गैंगस्टर मामले में निष्पक्ष जांच की मांग करने एसएसपी कार्यालय गए थे, तो तत्कालीन एसएसपी अविनाश पांडेय और अन्य पुलिसकर्मियों ने उनके साथ मारपीट की।

विपक्ष ने सरकार को घेरा

इस मुद्दे पर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर वीडियो साझा करते हुए भाजपा सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने इसे 'किसान का अपमान, देश का अपमान' बताते हुए लिखा कि हार के डर से सरकार बौखलाई हुई है। कांग्रेस ने भी इस घटना को 'जंगलराज' का भयानक चेहरा करार दिया और आरोप लगाया कि किसान नेता को थर्ड डिग्री टॉर्चर दिया गया।

आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद ने भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को टैग करते हुए इसे वर्दी की ताकत का दुरुपयोग बताया। उन्होंने घटना की निष्पक्ष जांच, सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित करने और दोषियों पर कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की है। चंद्रशेखर ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से भी मामले का संज्ञान लेने की अपील की।

किसान नेताओं के आरोप और पुलिस का पक्ष

दिग्विजय भाटी का आरोप है कि उन्हें और मोहित जाटव को एसएसपी कार्यालय के बाद एसओजी कार्यालय और फिर सिविल लाइंस थाने ले जाकर पीटा गया। उन्होंने दावा किया कि मारपीट के दौरान उन्हें अपमानित भी किया गया और चोट लगने पर डॉक्टरों को थाने बुलाया गया।

इसके विपरीत, मेरठ पुलिस ने सोशल मीडिया पर जारी एक बयान में इन आरोपों को "तथ्यहीन, असत्य एवं निराधार" बताया है। पुलिस के अनुसार, दिग्विजय भाटी और मोहित जाटव दोनों अपने-अपने थानों के हिस्ट्रीशीटर हैं और उनके खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। पुलिस का कहना है कि 19 अगस्त को दोनों पुलिस कार्यालय आए थे और वापस जाते समय उनकी स्कूटी फिसलने से वे घायल हो गए थे। पुलिस ने यह भी दावा किया कि इस संबंध में दोनों ने खुद ही थाने में लिखित प्रार्थना-पत्र दिया था।

इनपुट: IANS

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News4Social उत्तर प्रदेश डेस्क

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