सोमवार, 14 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
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असम का एक्वा टेक पार्क: आधुनिक तकनीक से कैसे बदल रही है मछली पालन की दुनिया

मछली पालन अब केवल तालाबों और नदियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि तकनीक और नवाचार के दम पर यह एक नए दौर में प्रवेश कर चुका है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, असम के सोनापुर में स्थित भारत का…

असम का एक्वा टेक पार्क: आधुनिक तकनीक से कैसे बदल रही है मछली पालन की दुनिया
(फोटो: IANS)

मछली पालन अब केवल तालाबों और नदियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि तकनीक और नवाचार के दम पर यह एक नए दौर में प्रवेश कर चुका है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, असम के सोनापुर में स्थित भारत का पहला एक्वा टेक पार्क इस बदलाव का एक जीवंत उदाहरण है, जहाँ कम पानी और सीमित संसाधनों में अधिक मछली उत्पादन के आधुनिक तरीके सिखाए जा रहे हैं। यह पार्क पारंपरिक मत्स्य पालन को एक व्यावसायिक मॉडल में बदलने की राह दिखा रहा है, जो प्रशिक्षण और उद्यमिता पर आधारित है।

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हाल ही में उत्तर प्रदेश के पत्रकारों के एक दल ने सोनापुर के बागीबाड़ी स्थित इस पार्क का दौरा किया। उन्होंने देखा कि कैसे यहाँ बायोफ्लॉक और एक्वापोनिक्स जैसी तकनीकों का प्रदर्शन किया जा रहा है। ये तकनीकें न केवल मछली उत्पादन बढ़ाती हैं, बल्कि सजावटी मछली पालन जैसे नए अवसर भी पैदा करती हैं।

पानी का कुशल उपयोग और नई तकनीकें

एक्वा टेक पार्क की सबसे बड़ी विशेषता पानी और संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल पर जोर देना है। बायोफ्लॉक तकनीक में बहुत कम पानी का प्रबंधन और पुन: उपयोग करके अधिक मछली उत्पादन किया जाता है। यह उन किसानों और युवाओं के लिए बेहद उपयोगी है, जहाँ बड़े तालाब या पर्याप्त जल स्रोत नहीं हैं। इसी तरह, एक्वापोनिक्स प्रणाली में मछली पालन को पौधों की खेती के साथ जोड़ा जाता है, जिससे एक ही सिस्टम में दोनों का उत्पादन संभव होता है। फिशरी विशेषज्ञ अश्लेषा श्रबोर्नि ने बताया कि किसानों को उनके क्षेत्र की परिस्थितियों और संसाधनों के आधार पर सही तकनीक चुनने का प्रशिक्षण दिया जाता है, ताकि हर जगह के लिए उपयुक्त समाधान मिल सके।

प्रशिक्षण और उद्यमिता का केंद्र

इस पार्क को विकसित करने वाली संस्था 'कालोंग-कोपिली' के प्रोजेक्ट डायरेक्टर ज्योतिष तालुकदार के अनुसार, उनका लक्ष्य इसे सिर्फ एक प्रदर्शन केंद्र तक सीमित रखना नहीं है, बल्कि इसे प्रशिक्षण, तकनीक, अनुसंधान और उद्यमिता का एक एकीकृत केंद्र बनाना है। संस्था 2007 से इस क्षेत्र में काम कर रही है और अब तक 60 हजार से अधिक किसानों को प्रशिक्षित कर चुकी है, जबकि एक लाख से अधिक युवाओं और महिलाओं को आजीविका के अवसरों से जोड़ा गया है। संस्था के प्रयासों से 350 से अधिक एक्वा उद्यमी भी तैयार हुए हैं।

पार्क की पृष्ठभूमि और भविष्य

इस मॉडल की शुरुआत 'एक्वाकल्चर फील्ड स्कूल' के रूप में 10 जुलाई 2021 को हुई थी, जिसे बाद में एक्वा टेक पार्क का स्वरूप दिया गया। पार्क का उद्घाटन असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने 12 जुलाई 2025 को किया था। इसके विकास में नाबार्ड, आईसीएआर-सीआईएफए और असम सरकार के मत्स्य विभाग की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। पार्क में अब सौर ऊर्जा जैसी नवीकरणीय ऊर्जा को भी जोड़ा जा रहा है, ताकि उत्पादन लागत कम हो और मत्स्य पालन पर्यावरण के अनुकूल बन सके। यह पहल पूर्वोत्तर की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नई दिशा देने की क्षमता रखती है।

इनपुट: IANS

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News4Social नेशनल डेस्क

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