इंदौर में कैलाश विजयवर्गीय का 'काफिर' वाला बयान, सोशल मीडिया पर वायरल
इंदौर के विधानसभा क्षेत्र-1 में 22 जून 2026 को भूमि पूजन कार्यक्रम में नगरीय मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि कुछ मुस्लिम भाई उन्हें 'काफिर' कहते हैं और अगर वे काफिर हैं तो उनकी बनाई सड़कों व सरकारी योजनाओं का लाभ न लें। आयोजन में 2.39 करोड़ रुपये के 10 कार्यों की घोषणा हुई। बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
मध्य प्रदेश के इंदौर में विधानसभा क्षेत्र क्रमांक-1 के तहत आने वाले वार्डों में रविवार, 22 जून 2026 को आयोजित भूमि पूजन कार्यक्रम में नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का एक बयान चर्चा का विषय बन गया। मंच से उन्होंने कहा कि कई मुस्लिम भाई उन्हें 'काफिर' कहते हैं और इसी संदर्भ में उन्होंने सरकारी सड़कों तथा योजनाओं के उपयोग को लेकर तीखी टिप्पणी की। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार यह बयान देखते ही देखते सोशल मीडिया पर फैल गया।
कार्यक्रम में मंत्री ने क्या कहा
एक रिपोर्ट के अनुसार वार्ड क्रमांक-1 और वार्ड क्रमांक-5 में विकास कार्यों के भूमि पूजन के मौके पर विजयवर्गीय ने क्षेत्र की मिश्रित आबादी का जिक्र किया। उन्होंने कहा, "यहां हिंदू भाई भी रहते हैं और मुसलमान भाई भी रहते हैं। कई मुस्लिम भाई हमको काफिर बोलते हैं।" इसके बाद सड़क निर्माण का हवाला देते हुए उन्होंने कहा, "अगर हम काफिर हैं और हमने सड़क बनाई है, तो इस पर मत चलो भाई।"
रिपोर्ट्स के मुताबिक यही बात वार्ड क्रमांक-1 के कार्यक्रम में भी दोहराई गई। सरकारी योजनाओं की ओर इशारा करते हुए मंत्री ने कहा कि अगर वे काफिर हैं तो लाड़ली बहना और लाड़ली लक्ष्मी योजना का पैसा भी न लिया जाए।
भूमि पूजन में हुई बड़ी घोषणा
इसी आयोजन में क्षेत्र के विकास को गति देने के मकसद से बड़ी रकम के कामों की घोषणा भी की गई। मिली जानकारी के मुताबिक:
कुल 10 विकास कार्यों का भूमि पूजन किया गया।
इन कार्यों पर लगभग 2 करोड़ 39 लाख 80 हजार रुपये खर्च होने का अनुमान बताया गया।
कार्यक्रम वार्ड क्रमांक-1 और क्रमांक-5 दोनों में आयोजित था, जहां स्थानीय बुनियादी ढांचे से जुड़े कामों की शुरुआत हुई।
मंत्री का स्पष्टीकरण और दावे
अपने बयान के साथ-साथ विजयवर्गीय ने सरकार की नीति का भी हवाला दिया। उनका कहना था कि उनकी सरकार "सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास" के सिद्धांत पर चलती है और किसी के साथ भेदभाव नहीं किया जाता।
उन्होंने यह भी दावा किया कि जनता वोट दे या न दे, उनका काम बिना किसी भेदभाव के केवल लोगों की सेवा करना है। इस तरह मंत्री ने एक ओर विवादास्पद टिप्पणी की, तो दूसरी ओर सरकार की समावेशी नीति का दावा भी प्रस्तुत किया।
सोशल मीडिया पर फैला बयान
रिपोर्ट्स के अनुसार मंत्री के इस बयान का वीडियो जल्द ही सोशल मीडिया पर फैल गया और सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा बन गया। तीनों उपलब्ध रिपोर्ट्स घटना के दिन, स्थान और बयान के मूल भाव पर एक राय रखती हैं।
आगे क्या
फिलहाल इस बयान को लेकर किसी आधिकारिक कार्रवाई या प्रशासनिक प्रतिक्रिया की जानकारी सामने नहीं आई है। मध्य प्रदेश की राजनीति में इस तरह के सार्वजनिक बयान अक्सर बहस का विषय बनते रहे हैं, और इंदौर में दिया गया यह बयान भी स्थानीय और प्रदेश स्तर पर चर्चा में बना हुआ है।



