फ्रांस में हिंसा: डोनाल्ड ट्रंप बोले- 'नफरत भरे दिलों' वाले लोगों ने देश बर्बाद कर दिया
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस के कई शहरों में हुई हिंसक झड़पों पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इसके लिए प्रवासियों को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि 'बिल्कुल अलग दुनिया से आए…
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस के कई शहरों में हुई हिंसक झड़पों पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इसके लिए प्रवासियों को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि 'बिल्कुल अलग दुनिया से आए लोग जिनके दिलों में नफरत भरी है' उनकी वजह से फ्रांस जल रहा है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, ट्रंप ने रविवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर लिखा, "इससे पहले की बहुत देर हो जाए, अपनी सीमाएं बंद करें और इसका नियंत्रण अपने हाथों में लें!"
ट्रंप के अलावा, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी फ्रांस की घटनाओं के लिए प्रवासियों को दोषी ठहराया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर उन्होंने लिखा कि पश्चिमी उदारवादियों ने विविधता और करुणा के नाम पर 'तीसरी दुनिया' को अपने यहां जगह दी, जबकि उन्हें इसके संभावित परिणामों की चेतावनी दी गई थी। वेंस ने उम्मीद जताई कि फ्रांस अपने ऐतिहासिक स्थलों को बचाने के लिए ज़रूरी कदम उठाएगा।
फ्रांस में हिंसा और विरोध प्रदर्शन
शनिवार को फ्रांस के कई शहरों में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हिंसक झड़पें हुईं। इस दौरान सरकारी इमारतों, दुकानों और पुलिस वाहनों को निशाना बनाया गया। प्रदर्शनकारियों ने लिमोज शहर के 143 साल पुराने ऐतिहासिक सिटी हॉल और लियोन में पर्यटन कार्यालय को आग लगा दी। वहीं, मार्सेई में प्रदर्शनकारियों ने सिटी हॉल की इमारत पर नारे लिख दिए।
फ्रांस के गृह मंत्रालय के मुताबिक, देशभर में लगभग 1,800 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें से 855 गिरफ्तारियां अकेले पेरिस में हुईं। अधिकारियों ने बताया कि पेरिस में एक व्यक्ति की हृदयाघात से मौत भी हो गई। इन प्रदर्शनों में देशभर से करीब पांच लाख लोगों ने हिस्सा लिया।
क्यों शुरू हुए थे प्रदर्शन?
यह आंदोलन पिछले महीने स्कूलों की खराब हालत और शिक्षकों की कमी के खिलाफ एक छात्र आंदोलन के रूप में शुरू हुआ था। हालांकि, बाद में यह महंगाई, असमानता, सार्वजनिक खर्च में कटौती और सरकारी सेवाओं की गिरती गुणवत्ता जैसे मुद्दों को लेकर एक व्यापक विरोध प्रदर्शन में बदल गया। ज्यादातर प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे, लेकिन कुछ जगहों पर हिंसक गुटों ने सार्वजनिक संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचाया।
इनपुट: IANS



