सोमवार, 27 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
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झारखंड ट्रेजरी घोटाला: भाजपा का आरोप - जांच के नाम पर 'चहेते' अफसरों को बचा रही हेमंत सरकार

झारखंड में कथित ट्रेजरी घोटाले की जांच को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने हेमंत सोरेन सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। पार्टी का आरोप है कि सरकार जांच एजेंसी सीआईडी का इस्तेमाल अपने पसंदीदा…

झारखंड ट्रेजरी घोटाला: भाजपा का आरोप - जांच के नाम पर 'चहेते' अफसरों को बचा रही हेमंत सरकार
(फोटो: IANS)

झारखंड में कथित ट्रेजरी घोटाले की जांच को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने हेमंत सोरेन सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। पार्टी का आरोप है कि सरकार जांच एजेंसी सीआईडी का इस्तेमाल अपने पसंदीदा अधिकारियों को बचाने के लिए कर रही है, जबकि केवल निचले स्तर के कर्मचारियों पर कार्रवाई की जा रही है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, भाजपा ने सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि यह जांच झारखंड कोषागार संहिता और वित्तीय नियमों के खिलाफ है।

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भाजपा के प्रदेश मुख्य प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने आरोप लगाया कि सीआईडी इस मामले में निष्पक्ष जांच करने की बजाय सरकार की 'पसंदीदा एजेंसी' (एजेंसी ऑफ चॉइस) की तरह काम कर रही है। उन्होंने याद दिलाया कि राज्य के वित्त मंत्री खुद यह मान चुके हैं कि पिछले कुछ वर्षों में लगभग 10,000 करोड़ रुपये के सरकारी धन का कोई हिसाब नहीं मिल रहा है। इसके बावजूद, जांच में वरिष्ठ अधिकारियों को बचाया जा रहा है।

जांच प्रक्रिया और अधिकारियों की भूमिका पर सवाल

प्रतुल शाहदेव ने जांच के लिए बनी विशेष जांच दल (SIT) की संरचना पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि एसआईटी में ऐसे अधिकारियों को शामिल किया गया है जो पहले उन जिलों में पुलिस अधीक्षक रह चुके हैं, जहां इस घोटाले से संबंधित चार्जशीट दाखिल की गई हैं। भाजपा प्रवक्ता के मुताबिक, ऐसे अधिकारियों से निष्पक्ष जांच की उम्मीद नहीं की जा सकती।

उन्होंने चारा घोटाले का उदाहरण देते हुए कहा कि उस मामले में सीबीआई अदालत ने ट्रेजरी अधिकारियों को भी दोषी ठहराया था, जिसे हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने भी सही माना। लेकिन मौजूदा मामले में, सीआईडी ने ड्रॉइंग एंड डिसबर्सिंग ऑफिसर्स (DDO) और ट्रेजरी अधिकारियों को क्लीनचिट दे दी है। शाहदेव ने जोर देकर कहा कि झारखंड वित्त नियमावली और कोषागार संहिता, 2016 में सरकारी धन की निकासी में इन अधिकारियों की स्पष्ट जिम्मेदारी तय की गई है, जिसमें बिलों और दस्तावेजों की प्रामाणिकता की जांच करना शामिल है।

दस्तावेज न देने का भी आरोप

भाजपा प्रवक्ता ने यह भी आरोप लगाया कि चाईबासा ट्रेजरी घोटाले में भी सीआईडी ने केवल छोटे कर्मचारियों को आरोपी बनाया और वरिष्ठों की भूमिका को नजरअंदाज कर दिया। उनके अनुसार, राज्य में जब भी किसी मामले पर पर्दा डालना होता है, तो उसे सीआईडी को सौंप दिया जाता है। प्रतुल शाहदेव ने यह भी कहा कि सरकार घोटाले की विशेष ऑडिट के लिए जरूरी दस्तावेज भी मुहैया नहीं करा रही है। उन्होंने बताया कि प्रिंसिपल अकाउंटेंट जनरल ने 11 मई, 2026 को गृह विभाग से 87 तरह के दस्तावेज मांगे थे, जो ढाई महीने बाद भी नहीं दिए गए हैं।

इनपुट: IANS

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News4Social नेशनल डेस्क

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