झारखंड: भर्ती परीक्षाओं में धांधली पर अब तक का सबसे बड़ा एक्शन, 2628 चयनित अफसरों-कर्मियों की नियुक्ति रद्द
झारखंड में सरकारी नौकरी की भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ियों के खिलाफ राज्य सरकार ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। CID और SIT की जांच में मिले सबूतों के आधार पर झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और…
झारखंड में सरकारी नौकरी की भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ियों के खिलाफ राज्य सरकार ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। CID और SIT की जांच में मिले सबूतों के आधार पर झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) द्वारा आयोजित 22 परीक्षाओं को एक साथ रद्द कर दिया गया है। इस फैसले से उन 2,628 अधिकारियों और कर्मचारियों की नियुक्तियां खत्म हो गई हैं, जो इन परीक्षाओं के जरिए चयनित होकर विभिन्न विभागों में काम कर रहे थे या जिन्हें नियुक्ति पत्र जारी हो चुके थे।
समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, राज्य के कार्मिक विभाग ने मंगलवार देर रात (11.45 बजे) इससे जुड़े कुल आठ आदेश जारी किए। विभाग के सचिव प्रवीण कुमार टोप्पो के हस्ताक्षर से जारी इन अधिसूचनाओं में बताया गया है कि यह कार्रवाई जांच एजेंसियों द्वारा सामने लाए गए तथ्यों पर आधारित है।
किन-किन नियुक्तियों पर पड़ा असर?
सरकार के इस कड़े कदम से प्रभावित होने वालों में 342 अधिकारी (11वीं से 13वीं JPSC परीक्षा से नियुक्त), 54 फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर, 63 एसडीपीओ, 237 महिला पर्यवेक्षिका और JSSC-CGL के माध्यम से नियुक्त 1,932 कर्मचारी शामिल हैं।
इसके अलावा, रद्द की गई प्रमुख परीक्षाओं में झारखंड संयुक्त असैनिक सेवा प्रतियोगिता परीक्षा 2023 और 2025, विश्वविद्यालयों में गैर-शैक्षणिक पदों पर भर्ती, सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों में सहायक प्रोफेसर, पॉलिटेक्निक कॉलेजों में लेक्चरर, मेडिकल कॉलेजों में सुपर स्पेशलिस्ट सहायक प्रोफेसर, सहायक निदेशक/वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी, ड्रग इंस्पेक्टर, सहायक वन संरक्षक, सहायक लोक अभियोजक, फूड सेफ्टी ऑफिसर और झारखंड पात्रता परीक्षा (JET)-2024 शामिल हैं।
कई पुरानी परीक्षाओं की भी होगी जांच
सरकार ने 22 परीक्षाएं रद्द करने के साथ ही छह अन्य परीक्षाओं की प्रक्रिया को अगले आदेश तक रोक दिया है। इनमें फूड एनालिस्ट, प्रोजेक्ट मैनेजर और बॉयलर इंस्पेक्टर जैसी भर्तियां शामिल हैं। वहीं, वर्ष 2014 से अब तक आयोजित हुईं 17 पुरानी भर्ती परीक्षाओं में भी अनियमितताओं की जांच के आदेश दिए गए हैं। इन परीक्षाओं में पांचवीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा 2013, सिविल जज, कृषि अधिकारी और डेंटल डॉक्टर समेत कई अन्य भर्तियां शामिल हैं।
परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए बड़े फैसले
भविष्य में ऐसी गड़बड़ियों को रोकने के लिए सरकार ने तीन अहम कदम उठाने का भी फैसला किया है:
1. फास्ट ट्रैक कोर्ट: भर्ती घोटालों से जुड़े मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए झारखंड हाईकोर्ट से एक फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन का अनुरोध किया जाएगा।
2. निगरानी प्रकोष्ठ: JPSC और JSSC की कार्यप्रणाली और परीक्षा प्रक्रिया पर नजर रखने के लिए एक आंतरिक निगरानी प्रकोष्ठ (Internal Monitoring Cell) बनाया जाएगा।
3. उच्चस्तरीय समिति: वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति का गठन होगा, जो दो महीने के भीतर परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए अपनी रिपोर्ट देगी।
इनपुट: IANS



