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जाने कैसे आजीवन ब्रह्मचारी रहें वात्सायन ने लिख डाली कामसूत्र

ऋषि वात्सायन के बारें में लगभग सभी ने सुना होगा। वात्सायन 'कामसूत्र' नामक किताब लिख चुके हैं।

जाने कैसे आजीवन ब्रह्मचारी रहें वात्सायन ने लिख डाली कामसूत्र

ऋषि वात्सायन के बारें में लगभग सभी ने सुना होगा। वात्सायन 'कामसूत्र' नामक किताब लिख चुके हैं। यह किताब पूरी दुनिया सेक्स से सम्बंधित क्रियाओं के लिए प्रसिद्ध है। यह किताब सदी की तीसरी शताब्दी में लिखी गयी। ऐसा कहा जाता है कि यह किताब समाज में सेक्स जैसे विषय पर लिखी गयी दुनिया की पहली किताब थी। इसे लिखने वाले वात्सायन के बारें में कहा जाता है भले ही उन्होंने सेक्स के बारें में इतना लिखा है लेकिन वह कभी सेक्स जैसी गतिविधियों में शामिल नहीं हुए थे। आइये कामसूत्र और वात्सायन के बारें में जानते हैं कुछ अंजान तथ्य-

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दुनिया के सबसे ज्यादा बिकने वाली किताब कामसूत्र के लेखक महर्षि वात्स्यायन पूरी ज़िन्दगी ब्रह्मचारी की तरह जीवन बिताया। ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए भी उन्हें सेक्स की बहुत गहरी समझ थी।वात्सायन सेक्स को एक आध्यात्मिक योग की तरह मानते थे। इसीलिए उन्होंने कामसूत्र की रचना की। लेकिन यह बहुत चिलचस्प लगता है जिस बन्दे ने सेक्स पर इतनी बड़ी और गहरी समझ वाली किताब लिखी वह कभी सेक्स में लिप्त ही न रहा। वात्सायन की बुद्धिमत्ता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है।

kama sutra 1

वात्सायन बनारस में रहते थे। वात्स्यायन ऋषि को बहुत ज्ञानी माना जाता है उन्हें वेदों की भी बहुत अच्छी समझ थी।कामसूत्र के अलावा उन्होंने 'न्याय सूत्र' नामक पुस्तक भी लिखी। यह किताब आध्यात्मिक उदारवाद पर आधारित थी।

ऐसा कहा जाता है कि वात्स्यायन को सेक्स का इतना ज्ञान वेश्यालयों में जाकर नग्न वेश्याओं से बात करके और उनके अनुभवों को जानने से हुआ। कामसूत्र की असल किताब जीवन जीने की कला यानि आर्ट ऑफ लिविंग की तरह देखना चाहिए।

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इतिहासकारों के मुताबिक वात्स्यायन को लगा कि सेक्स के विषय पर खुलकर चर्चा होनी चाहिए. इसकी अनदेखी नहीं की जा सकती। उन्होंने अपने किताब के माध्यम से इस बात को सुनिश्चित करने की कोशिश की कि लोग इस संबंध में बेहतर जानकारी हासिल कर सकें। आज भी दुनियाभर के लोग इस किताब को रेफर करते हैं. हज़ारों साल बाद भी ये प्रासंगिक है।

कामसूत्र पर कई फिल्में भी बन चुकी है। वास्तव में कामसूत्र को अगर पूरा अध्ययन किया जाए तो जीवन के मूल मतलब को समझाती है। इसीलिए यह पुस्तक हज़ारों सालों के बाद भी प्रासंगिक है।

PV

Pradeep Verma

Hindi literature , Films Enthusiastic, Screenplay Writer and Cricket Lover. सभी लेख देखें →

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