ईरान ने 'ईरान संघर्ष' शब्द पर जताई कड़ी आपत्ति, कहा- यह अमेरिका और इजरायल का आक्रामक युद्ध है
ईरान ने 'ईरान संघर्ष' जैसे शब्द के इस्तेमाल पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने स्पष्ट किया कि जिसे 'ईरान संघर्ष' कहा जा रहा है, वह असल में ईरान के खिलाफ…
ईरान ने 'ईरान संघर्ष' जैसे शब्द के इस्तेमाल पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने स्पष्ट किया कि जिसे 'ईरान संघर्ष' कहा जा रहा है, वह असल में ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल द्वारा छेड़ा गया एक गैरकानूनी और आक्रामक युद्ध है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह आपत्ति कतर और फ्रांस के बीच हुई एक कूटनीतिक चर्चा के बाद आई है।
दरअसल, हाल ही में कतर और फ्रांस ने क्षेत्रीय और वैश्विक चुनौतियों पर विचार-विमर्श किया था। इस दौरान दोनों देशों ने खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा, होर्मुज स्ट्रेट में नौवहन की स्वतंत्रता और मध्य पूर्व से जुड़े कई मुद्दों के साथ 'ईरान संघर्ष' पर भी चर्चा की। इसी शब्द के प्रयोग पर ईरान ने अपनी नाराजगी जाहिर की है।
सच्चाई को छिपाने की कोशिश: बाघेई
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट में इस्माइल बाघेई ने लिखा, "सच्चाई को भ्रामक और घुमा-फिराकर कहे गए शब्दों के पीछे न छिपाएं। 'ईरान संघर्ष' जैसी कोई चीज नहीं है। यह अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान के खिलाफ छेड़ा गया एक गैरकानूनी आक्रामक युद्ध है।"
उन्होंने आगे कहा कि आक्रमण को उसके असली नाम से न पुकारना तटस्थता नहीं, बल्कि नैतिक जिम्मेदारी से बचने की एक कोशिश है। बाघेई ने सवाल किया, "अगर हमारे पास इतना साहस भी नहीं है कि हम हमलावर की पहचान करें और आक्रमण को स्पष्ट रूप से आक्रमण कहें, तो फिर हम यह कैसे दावा कर सकते हैं कि हमारे पास अन्याय का सामना करने, व्यावहारिक समाधान सुझाने या शांति स्थापित करने में सार्थक योगदान देने का नैतिक साहस है?"
न्याय से ही संभव है सच्ची शांति
ईरानी प्रवक्ता ने इस बात पर जोर दिया कि शांति कभी भी हमलावरों को खुश करके, आक्रमण को वैध ठहराकर या पीड़ित पक्ष को दोषी ठहराकर स्थापित नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा, "सच्ची और टिकाऊ शांति तभी संभव है जब सच्चाई को स्वीकार किया जाए, न्याय का सम्मान किया जाए और सही-गलत के बीच स्पष्ट अंतर किया जाए।"
इनपुट: IANS



