ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई: पेंटागन ने 100 अमेरिकी सैनिकों के घायल होने की पुष्टि की
अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) ने पुष्टि की है कि ईरान के साथ चल रहे सैन्य अभियान में उसके 100 सैनिक घायल हुए हैं। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह जानकारी पेंटागन के मुख्य प्रवक्ता शॉन…
अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) ने पुष्टि की है कि ईरान के साथ चल रहे सैन्य अभियान में उसके 100 सैनिक घायल हुए हैं। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह जानकारी पेंटागन के मुख्य प्रवक्ता शॉन पार्नेल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर दी। उन्होंने बताया कि ये सभी सैनिक 7 जुलाई के बाद हुए हमलों में घायल हुए थे।
पार्नेल के मुताबिक, घायलों में से 96 फीसदी सैनिक इलाज के बाद अपनी ड्यूटी पर वापस लौट चुके हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि ज़्यादातर सैनिकों को हल्की सिर की चोट (कंकशन) आई थी। यह बयान न्यूयॉर्क टाइम्स की उस रिपोर्ट के जवाब में आया जिसमें दावा किया गया था कि रक्षा मंत्रालय हताहतों की जानकारी सार्वजनिक नहीं कर रहा है। प्रवक्ता ने यह भी कहा कि घायलों से जुड़ी विस्तृत जानकारी डिफेंस कैजुअल्टी एनालिसिस सिस्टम (डीसीएएस) पर जारी की जाएगी।
सैन्य अभियान और बढ़ते आंकड़े
इस बीच, हाल के दिनों में तीन और सैनिकों की मौत के साथ ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान में मरने वालों की कुल संख्या 17 हो गई है। पेंटागन के अनुसार, जॉर्डन में शुक्रवार को हुए एक ईरानी हमले में दो सैनिक मारे गए, जिनकी पहचान फर्स्ट लेफ्टिनेंट टायलर फीहान और प्राइवेट इसाबेला गोंजालेस के रूप में हुई है। वहीं, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने बताया कि उत्तरी इराक में शनिवार को एक और अमेरिकी सैनिक की जान चली गई, जब वह एक ईरानी ड्रोन के बिना फटे विस्फोटक को निष्क्रिय कर रहा था।
अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ अपने हमले जारी रखे हैं और सोमवार को एक और हवाई हमला किया, जो लगातार 10वें दिन की सैन्य कार्रवाई थी। पेंटागन के आंकड़ों के अनुसार, 28 फरवरी को शुरू हुए 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' के बाद से अब तक कुल 427 अमेरिकी सैनिक घायल हो चुके हैं।
राष्ट्रपति का बयान और अभियान का लक्ष्य
इस सैन्य अभियान पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में न्यूजनेशन को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि मारे गए सैनिकों ने "देश की सेवा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया"। उन्होंने एक बार फिर इस अभियान का मुख्य उद्देश्य दोहराते हुए कहा कि इसका लक्ष्य "ईरान को कभी भी परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देना" है।
इनपुट: IANS



