Indore News : नए महापौर के लिए सज रहा हॉउस | Mayor House Being Decorated For The New One | Patrika News h3>
नगर निगम जनकार्य विभाग ने ढाई साल से बदहाल पड़े मेयर हाउस की हालत सुधारने की सुध अब जाकर ली है, क्योंकि निगम चुनाव के चलते 6 जुलाई को मतदान और 17 जुलाई को मतगणना होगी। इस दिन शहर को नया महापौर और 85 पार्षद मिल जाएंगे। इसको देखते हुए निगम ने भोलाराम उस्ताद मार्ग यशवंत क्लब के सामने मेयर हाउस का रिनोवेशन शुरू करवा दिया है, ताकि मेंटेनेंस के अभाव में बदहाल हाउस नए महापौर को चकाचक और चमकता हुआ मिले। रिनोवेशन के तहत निगम हाउस की पहली मंजिल पर बने एल्युमिनियम सेक्शन और दीवार को तोड़ा गया है, ताकि नया निर्माण किया जा सके। ये काम पूरा होते ही रंगाई-पुताई की जाएगी।
19 फरवरी 2020 से पड़ा सुनसान उल्लेखनीय है कि निगम में भाजपा परिषद और महापौर का कार्यकाल 19 फरवरी 2020 को खत्म हो गया था। इसके बाद मेयर हाउस की तरफ निगम का कोई अफसर झांकने नहीं गया। नतीजतन यह बदहाल हो गया और चुनाव भी ढाई वर्ष लेट हो गए। हालांकि पिछली परिषद में जब मालिनी गौड़ महापौर थीं, तो उन्होंने इसे सचिवालय (ऑफिस) बना दिया था, लेकिन इनसे पहले मेयर हाउस में महापौर डॉ. उमाशशि शर्मा और कृष्णमुरारी मोघे परिवार के साथ ही रहते थे।
अफसरों को हटना होगा निगम मुख्यालय में महापौर के दफ्तर सहित 10 एमआइसी सदस्यों के कमरे हैं। साथ ही सभापति और नेता प्रतिपक्ष के भी कमरे हैं। ढाई वर्ष से अपर आयुक्त स्तर के अफसरों ने इन कमरों पर कब्जा जमा रखा है, क्योंकि ये कमरे सुसज्जित और बैठने के लिए व्यवस्थित हैं। अब अफसरों को ये कमरे खाली करना पड़ेंगे। जो भी राजनीतिक दल बहुमत के साथ चुनकर आएगा, उसमें से सभापति और एमआईसी मेंबर चुने जाएंगे, जिन्हें बैठाने को लेकर कमरों की जरूरत पड़ेगी। एमआइसी मेंबर्स के कुछ कमरे खाली पड़े हैं, जिनमें अभी अफसरों का स्टाफ बैठता है। हालांकि चुनाव के बाद आने वाली नई परिषद को देखते हुए निगम मुख्यालय में सभापति और एमआइसी मेंबर्स के कमरों की साफ-सफाई कराने की तैयारी है।
नई बिल्डिंग बन जाती तो… पूर्व महापौर कृष्णमुरारी मोघे के कार्यकाल में निगम मुख्यालय परिसर में नई बिल्डिंग (परिषद भवन) का निर्माण कार्य शुरू किया गया था। उनके साथ ही पूर्व महापौर मालिनी गौड़ के कार्यकाल में भी कार्य चलता रहा, लेकिन पूरा नहीं हुआ। तकरीबन 8 वर्ष गुजरने के बावजूद नई बिल्डिंग का काम आज तक पूरा नहीं हुआ। यह नई बिल्डिंग समय रहते बन जाती, तो सभापति, नेता प्रतिपक्ष और एमआइसी मेंबर सहित पार्षदों को बैठाने को लेकर दिक्कत नहीं होती।
अब नई परिषद व महापौर से उम्मीद नए परिषद भवन का निर्माण कार्य 27 अक्टूबर 2014 में शुरू हुआ था। इस काम को दो वर्ष में यानी 27 अक्टूबर 2016 को पूर्ण हो जाना था, लेकिन 8 वर्ष में भी निगम नए भवन का कार्य पूर्ण नहीं कर पाया। इसमें अभी लिफ्ट लगाने के साथ फिनिशिंग सहित अन्य कई निर्माण कार्य बाकी हैं। अब चुनाव के बाद नई परिषद और महापौर से उम्मीद है कि वह अधूरी पड़ी बिल्डिंग को पूरा करेंगे।
फिलहाल बैठ रहे ये अफसर-कर्मचारी अधूरे परिषद भवन में अभी निगम की स्थापना शाखा, योजना शाखा, पुल-पुलिया प्रकोष्ठ, फायर और कॉलोनी सेल के कर्मचारी बैठते हैं। इनके साथ ही अपर आयुक्त भव्या मित्तल, ऋषभ गुप्ता, संदीप सोनी, उपायुक्त अरुण शर्मा, लता अग्रवाल आदि के ऑफिस भी इसी बिल्डिंग में हैं।
नगर निगम जनकार्य विभाग ने ढाई साल से बदहाल पड़े मेयर हाउस की हालत सुधारने की सुध अब जाकर ली है, क्योंकि निगम चुनाव के चलते 6 जुलाई को मतदान और 17 जुलाई को मतगणना होगी। इस दिन शहर को नया महापौर और 85 पार्षद मिल जाएंगे। इसको देखते हुए निगम ने भोलाराम उस्ताद मार्ग यशवंत क्लब के सामने मेयर हाउस का रिनोवेशन शुरू करवा दिया है, ताकि मेंटेनेंस के अभाव में बदहाल हाउस नए महापौर को चकाचक और चमकता हुआ मिले। रिनोवेशन के तहत निगम हाउस की पहली मंजिल पर बने एल्युमिनियम सेक्शन और दीवार को तोड़ा गया है, ताकि नया निर्माण किया जा सके। ये काम पूरा होते ही रंगाई-पुताई की जाएगी।
19 फरवरी 2020 से पड़ा सुनसान उल्लेखनीय है कि निगम में भाजपा परिषद और महापौर का कार्यकाल 19 फरवरी 2020 को खत्म हो गया था। इसके बाद मेयर हाउस की तरफ निगम का कोई अफसर झांकने नहीं गया। नतीजतन यह बदहाल हो गया और चुनाव भी ढाई वर्ष लेट हो गए। हालांकि पिछली परिषद में जब मालिनी गौड़ महापौर थीं, तो उन्होंने इसे सचिवालय (ऑफिस) बना दिया था, लेकिन इनसे पहले मेयर हाउस में महापौर डॉ. उमाशशि शर्मा और कृष्णमुरारी मोघे परिवार के साथ ही रहते थे।
अफसरों को हटना होगा निगम मुख्यालय में महापौर के दफ्तर सहित 10 एमआइसी सदस्यों के कमरे हैं। साथ ही सभापति और नेता प्रतिपक्ष के भी कमरे हैं। ढाई वर्ष से अपर आयुक्त स्तर के अफसरों ने इन कमरों पर कब्जा जमा रखा है, क्योंकि ये कमरे सुसज्जित और बैठने के लिए व्यवस्थित हैं। अब अफसरों को ये कमरे खाली करना पड़ेंगे। जो भी राजनीतिक दल बहुमत के साथ चुनकर आएगा, उसमें से सभापति और एमआईसी मेंबर चुने जाएंगे, जिन्हें बैठाने को लेकर कमरों की जरूरत पड़ेगी। एमआइसी मेंबर्स के कुछ कमरे खाली पड़े हैं, जिनमें अभी अफसरों का स्टाफ बैठता है। हालांकि चुनाव के बाद आने वाली नई परिषद को देखते हुए निगम मुख्यालय में सभापति और एमआइसी मेंबर्स के कमरों की साफ-सफाई कराने की तैयारी है।
अब नई परिषद व महापौर से उम्मीद नए परिषद भवन का निर्माण कार्य 27 अक्टूबर 2014 में शुरू हुआ था। इस काम को दो वर्ष में यानी 27 अक्टूबर 2016 को पूर्ण हो जाना था, लेकिन 8 वर्ष में भी निगम नए भवन का कार्य पूर्ण नहीं कर पाया। इसमें अभी लिफ्ट लगाने के साथ फिनिशिंग सहित अन्य कई निर्माण कार्य बाकी हैं। अब चुनाव के बाद नई परिषद और महापौर से उम्मीद है कि वह अधूरी पड़ी बिल्डिंग को पूरा करेंगे।