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दिल्ली लाडली योजना में बच्ची का नाम कैसे देखें ?

दिल्ली सरकार ने साल 2008 से लाडली स्कीम शुरू की. स्कीम के तहत बच्चियों को उनके जन्म पर और कक्षा 12 तक की पढ़ाई के लिए विभिन्न चरणों में 35000 रुपये से लेकर…

दिल्ली लाडली योजना में बच्ची का नाम कैसे देखें ?

दिल्ली सरकार ने साल 2008 से लाडली स्कीम शुरू की. स्कीम के तहत बच्चियों को उनके जन्म पर और कक्षा 12 तक की पढ़ाई के लिए विभिन्न चरणों में 35000 रुपये से लेकर 36000 रुपये तक की वित्तीय मदद दिल्ली सरकार की ओर से मिलती है. लाडली स्कीम में बच्चियों को दिल्ली सरकार की ओर से मिलने वाली रकम उनके बैंक खाते में रकम जाती है.

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इस योजना का लाभ लेने के लिए सबसे पहले आपको आवेदन करना होगा. आवेदक परिवार लाडली स्कीम के लिए एप्लीकेशन फाइल करने के कम से कम 3 साल पहले से दिल्ली में रह रहा हो. बच्ची के परिवार की सालाना इनकम 1 लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए. बच्ची दिल्ली में ही पैदा हुई हो. लाडली स्कीम का लाभ परिवार में दो लड़कियों तक ही सीमित है. बच्ची जिस स्कूल में पढ़ती है उसे दिल्ली सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त होना चाहिए.

ladli scheme
लाडली योजना

इसके आवेदन के लिए कुछ डाक्युमेंट की जरूरत भी होगी. दिल्ली में तीन साल से रहने का प्रमाण (राशन कार्ड, बिजली/पानी के बिल आदि). बच्ची के माता-पिता का आय प्रमाण पत्र. बालिका का जन्म प्रमाण पत्र (बर्थ सर्टिफिकेट). बच्ची के परिवार की फोटो, आवेदक का जाति प्रमाण पत्र (अनुसूचित जाति/जनजाति के मामले में). बच्ची और माता-पिता दोनों का आधार कार्ड जरूरी होगा. 

Ladli Yojana Delhi
लाडली योजना

आप एक बार इसके लिए आवेदन करते हैं, तो आपके पास इससे संबंधित लैटर आ जाता है. अगर आपके पास नहीं आता है, तो आप इसको Online जाकर भी डाऊनलोड कर सकते हैं. उसके लिए सबसे पहले आपको Dept. of Women & Child Development: (wcddel.in) की वेबसाइट पर जाना होगा. वहां पर आपको To Know Status of Applications Under Ladli Scheme -2008   का विकल्प मिल जाएगा. जिसके सामने Click का विकल्प मिलेगा. इसके बाद आप अपने आवेदन पत्र से संबंधित डिटेल भरकर आवेदन का Status देख सकते हैं.

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लाडली स्कीम में बच्ची के 18 साल का होने और रेगुलर स्टूडेंट के रूप में 10वीं की परीक्षा पास कर लेने या 12वीं कक्षा में एडमिशन लेने तक उसके अकाउंट में ​जमा रकम का प्रबंधन SBI लाइफ इंश्योरेंस कंपनी करती है. उल्लिखित स्टेज पर पहुंचने के बाद बच्ची मैच्योरिटी अमाउंट क्लेम कर सकती है यानी रकम को निकाला जा सकता है. इस रकम को बच्ची की उच्च शिक्षा या वोकेशनल ट्रेनिंग या कोई माइक्रो एंटरप्राइज स्थापित करने में इस्तेमाल किया जा सकता है.

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KJ

Kapil Jakhar

कपिल जाखड़ News4Social के कंटेंट राइटर हैं। वे समसामयिक घटनाक्रम, फ़ीचर और सामान्य ज्ञान से जुड़े विषयों पर लिखते हैं, और जानकारी को सरल व तथ्यपरक भाषा में प्रस्तुत करने पर ज़ोर देते हैं। सभी लेख देखें →

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