रविवार, 18 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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होरमुज़ जलडमरूमध्य में तनाव बढ़ा, एक हफ्ते में 14 जहाजों पर हमले से वैश्विक व्यापार पर चिंता

वैश्विक ऊर्जा व्यापार के लिए बेहद अहम माने जाने वाले होरमुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) और उसके आसपास के समुद्री क्षेत्र में जहाजों पर हमलों में चिंताजनक वृद्धि देखी गई है। यूनाइटेड किंगडम…

होरमुज़ जलडमरूमध्य में तनाव बढ़ा, एक हफ्ते में 14 जहाजों पर हमले से वैश्विक व्यापार पर चिंता
(फोटो: IANS)

वैश्विक ऊर्जा व्यापार के लिए बेहद अहम माने जाने वाले होरमुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) और उसके आसपास के समुद्री क्षेत्र में जहाजों पर हमलों में चिंताजनक वृद्धि देखी गई है। यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, सिर्फ एक सप्ताह के भीतर 14 जहाजों को निशाना बनाया गया है, जिससे इस रणनीतिक मार्ग पर समुद्री सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

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समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, यह उथल-पुथल ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल के युद्ध की शुरुआत के बाद से हमलों में सबसे तेज साप्ताहिक वृद्धि है। 8 से 14 अक्टूबर के बीच हुईं इन घटनाओं में अकेले 11 अक्टूबर को ही कम से कम छह जहाजों पर हमला किया गया। ताजा हमलों में रविवार सुबह यमन और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के तट के पास दो जहाज शामिल हैं। इससे पहले शनिवार को ईरानी सुरक्षा बलों ने तीन जहाजों में आग लगने की सूचना दी थी, जिनमें से दो होरमुज़ के पास समुद्री बारूदी सुरंगों की चपेट में आ गए थे।

व्यापार और आवाजाही पर असर

इन बढ़ते हमलों का सीधा असर जहाजों की आवाजाही पर पड़ा है। 8 से 14 अक्टूबर के सप्ताह में इस मार्ग से केवल 42 जहाज गुजरे, जबकि इससे ठीक पहले वाले सप्ताह में यह संख्या 60 थी। इस मार्ग का उपयोग करने वाले अधिकांश जहाज पेट्रोलियम उत्पाद ले जाते हैं, इसलिए इस गिरावट से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार पर दबाव बढ़ने की आशंका है। 1 मार्च से अब तक इस क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा से जुड़ी कुल 149 घटनाएं दर्ज की जा चुकी हैं।

अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी

यह घटनाक्रम ऐसे समय में हो रहा है जब अमेरिकी सेना ने ईरानी बंदरगाहों पर नौसैनिक नाकेबंदी जारी रखी हुई है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, नाकेबंदी दोबारा लागू होने के बाद से अब तक अमेरिकी सेना ने लगभग 138 जहाजों का मार्ग बदलवाया है। होरमुज़ जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है और खाड़ी देशों से कच्चे तेल के निर्यात के लिए यह एक महत्वपूर्ण धमनी की तरह है। यहां किसी भी तरह की रुकावट का असर सीधे तौर पर तेल की आपूर्ति, परिवहन लागत और अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर पड़ सकता है।

इनपुट: IANS

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