अहमदाबाद: WhatsApp पर बॉस बनकर लगाया 3 करोड़ का चूना, पुलिस ने 5 घंटे में लगभग पूरी रकम बचाई
अहमदाबाद की एक दवा कंपनी के साथ हुई 3 करोड़ रुपये की ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामले में पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल की है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, पुलिस ने महज़ 4 से 5 घंटे की त्वरित कार्रवाई में ठगी…
अहमदाबाद की एक दवा कंपनी के साथ हुई 3 करोड़ रुपये की ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामले में पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल की है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, पुलिस ने महज़ 4 से 5 घंटे की त्वरित कार्रवाई में ठगी गई रकम में से 2.94 करोड़ रुपये फ्रीज कर दिए। यह घटना 18 अगस्त को चांगोदर पुलिस थाना क्षेत्र में स्थित 'प्योर एंड क्योर' नामक कंपनी में हुई, जहाँ एक कर्मचारी को धोखेबाजों ने व्हाट्सएप पर बॉस बनकर निशाना बनाया।
कंपनी के अकाउंटेंट हार्दिक पटेल को एक अनजान नंबर से व्हाट्सएप संदेश मिला। इस नंबर पर उनके वरिष्ठ अधिकारी की प्रोफाइल फोटो और नाम का इस्तेमाल किया गया था। अहमदाबाद ग्रामीण पुलिस के डीएसपी तपनसिंह डोडिया ने मंगलवार को बताया कि धोखेबाजों की बातचीत का तरीका और भाषा भी पटेल के असली बॉस से काफी मिलती-जुलती थी, जिस कारण उन्हें शक नहीं हुआ।
कैसे हुई करोड़ों की ठगी?
नकली बॉस ने हार्दिक पटेल को तीन करोड़ रुपये का एक वित्तीय लेनदेन करने का निर्देश दिया। इसे वास्तविक आदेश मानकर पटेल ने कंपनी के खाते से पैसे ट्रांसफर कर दिए। लेनदेन पूरा होने के बाद जब पटेल ने अपने असली बॉस को फोन कर भुगतान की जानकारी दी, तब उन्हें धोखाधड़ी का एहसास हुआ। इसके तुरंत बाद पुलिस को सूचित किया गया और पटेल को पुलिस स्टेशन लाकर खातों को फ्रीज करने की कार्रवाई शुरू की गई।
पुलिस की कार्रवाई और पैसों की रिकवरी
पुलिस ने चांगोदर पुलिस स्टेशन और एलसीबी साइबर सेल की संयुक्त टीम बनाकर फौरन कार्रवाई की। डीएसपी डोडिया के मुताबिक, शुरुआती तीन करोड़ रुपये आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले में गोकुल गुरुवर्धन नाम के व्यक्ति के खाते में भेजे गए थे। वहां से 6-6 लाख रुपये के दो ट्रांजैक्शन मध्य प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के दो अलग-अलग खातों में किए गए।
पुलिस ने 2.94 करोड़ रुपये की रकम फ्रीज कर दी थी। बाद में अदालत के आदेश से इसमें से 2.88 करोड़ रुपये शिकायतकर्ता कंपनी को लौटा दिए गए हैं। बाकी के 6 लाख रुपये भी जल्द ही वसूल कर लिए जाएंगे।
जांच अभी जारी
पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि जिन खातों में पैसा गया, वे गुप्त खाते थे या खाताधारक खुद अपराध में शामिल थे। डीएसपी ने बताया कि कंपनी में अक्सर बड़े लेन-देन होते रहते हैं, इसलिए अकाउंटेंट को 3 करोड़ के ट्रांजैक्शन पर कोई संदेह नहीं हुआ। पुलिस टीमें आगे की जांच के लिए दूसरे राज्यों में भी गई हैं।
इनपुट: IANS



