रितु बराला पर हमला: FIR पर पुलिस से टकराव के बाद अब अदालत जाएगी कांग्रेस
जयपुर में NSUI नेता रितु बराला पर हुए कथित पुलिस हमले के मामले में राजस्थान कांग्रेस ने अब कानूनी लड़ाई लड़ने का फैसला किया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, पार्टी नेताओं ने पुलिस पर FIR दर्ज करने…
जयपुर में NSUI नेता रितु बराला पर हुए कथित पुलिस हमले के मामले में राजस्थान कांग्रेस ने अब कानूनी लड़ाई लड़ने का फैसला किया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, पार्टी नेताओं ने पुलिस पर FIR दर्ज करने में निष्क्रियता और दिल्ली के दबाव में काम करने का आरोप लगाते हुए कहा है कि वे न्याय के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे। यह घोषणा जयपुर पुलिस कमिश्नरेट पर दिए गए तीन दिवसीय धरने की समाप्ति के बाद की गई।
यह पूरा विवाद इस महीने की शुरुआत में छात्र नेता रितु बराला के साथ हुई कथित मारपीट की घटना से जुड़ा है। कांग्रेस नेताओं की मांग थी कि इस मामले में जिम्मेदार पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज की जाए। इसी मांग को लेकर राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और कांग्रेस नेता टीकाराम जूली के नेतृत्व में तीन दिन का धरना दिया गया।
पुलिस पर कानून की गलत व्याख्या का आरोप
गोविंद सिंह डोटासरा ने बताया कि पुलिस ने उनकी शिकायत पर 'जीरो एफआईआर' दर्ज करने से यह कहकर इनकार कर दिया कि ऐसा देश में कहीं नहीं किया जा सकता। डोटासरा ने पुलिस के इस दावे को गलत ठहराते हुए सवाल उठाया, "अगर केरल में 'जीरो एफआईआर' दर्ज हो सकती है, तो राजस्थान में क्यों नहीं?" उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस कानून की गलत व्याख्या कर रही है।
डोटासरा ने कहा, "अब अदालत यह तय करेगी कि जो प्रावधान केरल में लागू है, उसे राजस्थान में क्यों नहीं लागू किया जा रहा है।"
भाजपा एजेंट की तरह काम कर रही पुलिस: जूली
कांग्रेस नेता टीकाराम जूली ने भी पुलिस अधिकारियों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारी भाजपा के एजेंट के रूप में काम कर रहे हैं और कानून का उल्लंघन कर रहे हैं। जूली ने स्पष्ट किया कि पार्टी न केवल मारपीट और दिल्ली पुलिस की भूमिका को लेकर, बल्कि उन राजस्थानी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई करेगी जिन्होंने उचित कदम नहीं उठाए।
इसी बीच, धरने के दौरान गोविंद सिंह डोटासरा सीढ़ियों पर फिसलकर गिर गए, जिससे उनके पैर में चोट आ गई। इस घटना को लेकर टीकाराम जूली ने पुलिस कमिश्नरेट परिसर में बुनियादी सुविधाओं की कमी और पुलिस के कठोर रवैये की आलोचना की।
इनपुट: IANS



