कर्नाटक: आरटीसी में वक्फ एंट्री पर भाजपा का हमला — 3 लाख जमीन रिकॉर्ड प्रभावित होने का दावा
कर्नाटक के 1.80 लाख से अधिक भूमि रिकॉर्ड (आरटीसी) में वक्फ से जुड़ी एंट्रीज दर्ज होने की खबरों ने राज्य की राजनीति को एक बार फिर गरमा दिया है। विधानसभा में विपक्ष के नेता और वरिष्ठ भाजपा नेता आर. अशोक
कर्नाटक के 1.80 लाख से अधिक भूमि रिकॉर्ड (आरटीसी) में वक्फ से जुड़ी एंट्रीज दर्ज होने की खबरों ने राज्य की राजनीति को एक बार फिर गरमा दिया है। विधानसभा में विपक्ष के नेता और वरिष्ठ भाजपा नेता आर. अशोक ने सोमवार को जारी बयान में सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
क्या है पूरा मामला?
IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, अशोक का आरोप है कि 'रिकॉर्ड ऑफ राइट्स, टेनेसी एंड क्रॉप्स' (आरटीसी) के कॉलम 11 में वक्फ का उल्लेख किए जाने से प्रदेश के लाखों किसानों में गहरी चिंता फैल गई है। उनके अनुसार यह प्रक्रिया अब तक 1.80 लाख आरटीसी तक पहुँच चुकी है और इसे करीब तीन लाख भूमि रिकॉर्ड तक विस्तारित किया जा रहा है — जिसका असर राज्य के सभी 31 जिलों के किसानों पर पड़ सकता है।
जिलेवार आंकड़े — कहाँ कितना असर?
अशोक ने इस मुद्दे की व्यापकता दर्शाने के लिए जिला-दर-जिला आँकड़े सामने रखे। उनके दावे के अनुसार कारवार में लगभग 73,000, मंगलुरु में 48,000, शिवमोग्गा में 38,000, बेंगलुरु दक्षिण में 18,000, तथा कलबुर्गी और बागलकोट में 17,000-17,000 आरटीसी में ऐसी एंट्रीज दर्ज हैं।
भाजपा की माँग — श्वेत पत्र और एंट्रीज की समीक्षा
अशोक ने मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को सीधे संबोधित करते हुए तीन माँगें रखीं — पूरी प्रक्रिया तत्काल रोकी जाए, आरटीसी में दर्ज वक्फ एंट्रीज की समीक्षा हो और इस विषय पर सार्वजनिक श्वेत पत्र जारी किया जाए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या इन एंट्रीज के चलते किसानों को जमीन बेचने, बैंक ऋण लेने या मालिकाना हक के इस्तेमाल में बाधाओं का सामना करना पड़ेगा।
उन्होंने इस मुद्दे को महज रिकॉर्ड-संशोधन का मामला मानने से इनकार करते हुए इसे "मालिकाना हक, रोज़ी-रोटी और किसानों के भविष्य का सवाल" बताया। कांग्रेस सरकार पर तुष्टिकरण की राजनीति को किसान-कल्याण से ऊपर रखने का आरोप लगाते हुए अशोक ने कहा, "किसान देश का पेट भरता है। उसी किसान को अपनी ही जमीन का मालिकाना हक साबित करने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगवाना 'अन्नदाता' के श्राप को न्योता देने जैसा है।"
साथ ही उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा, "जहाँ तक किसानों की जमीन का सवाल है, इसमें कोई समझौता नहीं हो सकता। अगर कोई किसानों की जमीन पर बुरी नजर डालता है, तो कर्नाटक की जनता उसे मुंहतोड़ जवाब देगी।"
पुरानी बहस, नया मोड़
कर्नाटक में वक्फ भूमि का विवाद हाल के वर्षों में बार-बार सियासी तूफान खड़ा करता रहा है। भाजपा का लगातार यह आरोप रहा है कि वक्फ रिकॉर्ड की आड़ में किसानों की जमीन पर दावे ठोके जा रहे हैं। दूसरी तरफ, कांग्रेस सरकार का पक्ष रहा है कि किसी भी किसान के स्वामित्व अधिकार पर कोई आँच नहीं आएगी और यदि कोई अनियमितता पाई गई तो उसकी जाँच कानून के तहत होगी। अशोक के ताजा बयान ने इस बहस को एक बार फिर कर्नाटक की राजनीति के केंद्र में ला खड़ा किया है।
इनपुट: IANS



