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अमेरिका-सऊदी परमाणु समझौता: दो सीनेटरों ने पेश किया विरोध प्रस्ताव, हथियारों की होड़ की जताई चिंता

अमेरिका में दो डेमोक्रेट सीनेटरों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन द्वारा सऊदी अरब के साथ किए जा रहे एक असैन्य परमाणु सहयोग समझौते को रोकने के लिए एक प्रस्ताव पेश किया है। समाचार एजेंसी IANS के…

अमेरिका-सऊदी परमाणु समझौता: दो सीनेटरों ने पेश किया विरोध प्रस्ताव, हथियारों की होड़ की जताई चिंता
(फोटो: IANS)

अमेरिका में दो डेमोक्रेट सीनेटरों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन द्वारा सऊदी अरब के साथ किए जा रहे एक असैन्य परमाणु सहयोग समझौते को रोकने के लिए एक प्रस्ताव पेश किया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इन सीनेटरों ने चेतावनी दी है कि यह सौदा मध्य पूर्व में परमाणु हथियारों की होड़ को जन्म दे सकता है, क्योंकि इसमें आवश्यक सुरक्षा उपाय शामिल नहीं हैं।

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ओरेगन के सीनेटर जेफ मर्कले और मैसाचुसेट्स के सीनेटर एडवर्ड मार्के ने यह संयुक्त प्रस्ताव पेश किया है। संघीय कानून के तहत, ऐसे किसी भी समझौते को लागू होने से पहले अमेरिकी कांग्रेस के पास समीक्षा के लिए 90 दिनों का समय होता है। यदि कांग्रेस इस अवधि में इसे रोकने का प्रस्ताव पारित नहीं करती, तो यह समझौता स्वतः लागू हो जाएगा। इस प्रस्ताव के बाद 29 नवंबर के बाद सीनेट में इस पर मतदान का रास्ता खुल गया है, जो रियाद के साथ ट्रंप प्रशासन की परमाणु कूटनीति के लिए एक नई चुनौती है।

समझौते पर क्यों उठाए जा रहे हैं सवाल?

सीनेटरों का तर्क है कि यह समझौता परमाणु अप्रसार के दो प्रमुख मानकों पर खरा नहीं उतरता। पहला, इसमें तथाकथित 'गोल्ड स्टैंडर्ड' का अभाव है, जिसके तहत सऊदी अरब को यूरेनियम संवर्धन या खर्च हो चुके परमाणु ईंधन को दोबारा संसाधित नहीं करने की प्रतिबद्धता जतानी होती है। दूसरा, इसमें अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के अतिरिक्त प्रोटोकॉल का पालन अनिवार्य नहीं किया गया है, जो निरीक्षकों को किसी भी अघोषित परमाणु गतिविधि का पता लगाने के लिए व्यापक पहुंच देता है।

सीनेटरों ने चिंता जताई है कि इन शर्तों के बिना सऊदी अरब को परमाणु तकनीक देना एक खतरनाक मिसाल कायम करेगा। उन्होंने संयुक्त अरब अमीरात का उदाहरण दिया, जिसके साथ हुए अमेरिकी परमाणु समझौते में ऐसी संवेदनशील गतिविधियों पर कड़े प्रतिबंध शामिल थे।

"यह मेगावाट नहीं, मेगाटन का सौदा है"

सीनेट की विदेश संबंध समिति के एक वरिष्ठ सदस्य जेफ मर्कले ने कहा, "सऊदी अरब को अमेरिका की असैन्य परमाणु ऊर्जा तकनीक तक पहुंच देना, बिना इस बात की पुख्ता गारंटी के कि यह परमाणु बम की नींव नहीं बनेगी, अस्वीकार्य है। हम इतने बड़े फैसले में आंख बंद करके नहीं चल सकते।"

वहीं, सीनेटर एडवर्ड मार्के ने इस समझौते को क्षेत्र को और अस्थिर करने वाला बताते हुए कहा, "अमेरिका-सऊदी परमाणु डील मेगावाट के बारे में नहीं, बल्कि मेगाटन के बारे में है।" उन्होंने प्रशासन पर स्थापित अप्रसार मानकों से समझौता करने का आरोप लगाते हुए कहा, "यह डील मध्य पूर्व में परमाणु हथियारों की होड़ की शुरुआत है। कांग्रेस को इसे खारिज करना चाहिए।" उनका यह भी मानना है कि यदि सऊदी अरब को ऐसी छूट दी गई जो ईरान को नहीं मिली, तो तेहरान भी भविष्य में अपने परमाणु कार्यक्रम पर लगे प्रतिबंधों का विरोध कर सकता है।

इनपुट: IANS

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News4Social इंटरनेशनल डेस्क

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