अमेरिका ने क्यूबा के निकेल उद्योग और सैन्य नेटवर्क पर लगाए नए प्रतिबंध, 8 संस्थाओं और 3 अधिकारियों पर कार्रवाई
अमेरिका ने क्यूबा पर नए आर्थिक प्रतिबंधों की घोषणा की है, जिसके तहत उसके निकेल उद्योग से जुड़ी चार सरकारी कंपनियों और सैन्य अनुसंधान से जुड़ी चार अन्य संस्थाओं को निशाना बनाया गया है। समाचार एजेंसी…
अमेरिका ने क्यूबा पर नए आर्थिक प्रतिबंधों की घोषणा की है, जिसके तहत उसके निकेल उद्योग से जुड़ी चार सरकारी कंपनियों और सैन्य अनुसंधान से जुड़ी चार अन्य संस्थाओं को निशाना बनाया गया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, इस कार्रवाई में तीन वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों को भी प्रतिबंधित किया गया है। इन प्रतिबंधों का उद्देश्य क्यूबा सरकार के राजस्व स्रोतों पर दबाव बनाना है।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के मुताबिक, यह कदम एग्जीक्यूटिव ऑर्डर 14404 के तहत उठाया गया है। यह आदेश क्यूबा में मानवाधिकारों के दमन और अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरे से जुड़े मामलों में प्रतिबंध लगाने का अधिकार देता है। अमेरिकी विदेश विभाग ने आरोप लगाया है कि क्यूबा की सरकार खनिजों से होने वाली आय का इस्तेमाल अपने सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने के लिए करती है, न कि आम नागरिकों के जीवन स्तर को सुधारने के लिए।
प्रतिबंधों के दायरे में कौन-कौन?
सैन्य संस्थाएं और अधिकारी: प्रतिबंधों की सूची में चार सैन्य-संबद्ध संस्थाएं शामिल हैं: सिम्परो (ट्रेनिंग सिम्युलेटर), सीआईडीएनएवी (नौसेना अनुसंधान), सीआईडीएआई (पैदल सैनिकों के हथियार) और जेलकॉम (इलेक्ट्रॉनिक्स और कम्युनिकेशन)। इनके साथ ही तीन अधिकारियों पर भी प्रतिबंध लगाए गए हैं:
- जोकिन फ्रांसिस्को कैनसियो मोंटेगुडो (डायरेक्टर जनरल, सिम्परो)
- डियोग्लिस पेड्रेरा आर्गुएलो (डायरेक्टर जनरल, सीआईडीएनएवी)
- जूलियो हर्टाडो बेटनकोर्ट (डायरेक्टर जनरल, सीआईडीएआई)
निकेल उद्योग की कंपनियां: निकेल को क्यूबा सरकार के लिए विदेशी मुद्रा का एक प्रमुख स्रोत बताते हुए चार संबंधित कंपनियों को भी प्रतिबंधित किया गया है। ये हैं- सेरकोनी, सेप्रोनिकेल, सेडिनिक और पिनारेस एस.ए., जो तकनीकी सेवाओं से लेकर भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण तक का काम करती हैं।
प्रतिबंधों का क्या होगा असर?
इन प्रतिबंधों के तहत, सूची में शामिल व्यक्तियों और संस्थाओं की अमेरिका स्थित या किसी अमेरिकी व्यक्ति के नियंत्रण वाली सभी संपत्तियां फ्रीज कर दी जाएंगी। अमेरिकी वित्त मंत्रालय के ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल (OFAC) को ऐसी किसी भी संपत्ति की रिपोर्ट करनी होगी। इसके अलावा, अमेरिकी नागरिकों को इन प्रतिबंधित पक्षों के साथ किसी भी तरह के लेन-देन की मनाही होगी।
वॉशिंगटन ने विदेशी कंपनियों और वित्तीय संस्थानों को भी चेतावनी दी है कि यदि वे इन प्रतिबंधित संस्थाओं के साथ कारोबार करते हैं, तो वे भी अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे में आ सकते हैं। विदेश विभाग ने स्पष्ट किया है कि इन प्रतिबंधों का लक्ष्य क्यूबा के व्यवहार में बदलाव लाना है।
इनपुट: IANS



