अमेरिका में भारतीयों के खिलाफ नफरत हिंसा में बदल रही है: सांसद राजा कृष्णमूर्ति की चेतावनी
अमेरिका में भारतीय समुदाय के खिलाफ नफरत फैलाने वाली बयानबाजी अब खतरनाक रूप से हिंसा में तब्दील हो रही है। यह चेतावनी भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद राजा कृष्णमूर्ति ने दी है, जिन्होंने हाल ही में शिकागो…
अमेरिका में भारतीय समुदाय के खिलाफ नफरत फैलाने वाली बयानबाजी अब खतरनाक रूप से हिंसा में तब्दील हो रही है। यह चेतावनी भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद राजा कृष्णमूर्ति ने दी है, जिन्होंने हाल ही में शिकागो के पास एक हिंदू मंदिर पर हमले की कोशिश को एक बड़ी त्रासदी का संकेत बताया है। समाचार एजेंसी IANS को दिए एक विशेष साक्षात्कार में उन्होंने कुछ राजनीतिक नेताओं पर माहौल बिगाड़ने और संघीय एजेंसियों की जांच पर गंभीर सवाल उठाए।
इलिनॉय राज्य का प्रतिनिधित्व करने वाले कृष्णमूर्ति ने 11 अक्टूबर की उस घटना का जिक्र किया जब नवरात्रि समारोह के दौरान एक हमलावर ने बालाजी मंदिर को निशाना बनाने की कोशिश की। उन्होंने बताया, "मेरे परिवार सहित कई परिवार उस समय बालाजी मंदिर के अंदर थे। हमें बिल्कुल नहीं पता था कि मंदिर के बाहर एक बंदूकधारी मौजूद है, जिसके पास एआर-15 शैली का हथियार और 300 से ज्यादा गोलियां थीं।"
बंदूक जाम होने से टला बड़ा नरसंहार
सांसद के अनुसार, हमलावर बड़े पैमाने पर लोगों की हत्या करने की तैयारी में था, लेकिन उसकी बंदूक एक गोली चलाने के बाद जाम हो गई, जिससे एक बड़ा नरसंहार टल गया। कृष्णमूर्ति ने इस घटना पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि आरोपी पर हथियारों से जुड़े आरोपों के अलावा आतंकवाद से संबंधित एक आरोप भी लगाया गया है।
उन्होंने बताया कि इस मामले में जांच की मांग करने के बावजूद उन्हें अब तक एफबीआई (Federal Bureau of Investigation) की ओर से कोई जवाब नहीं मिला है। जब उनसे एफबीआई निदेशक काश पटेल की चुप्पी के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, "मुझे नहीं पता। इसके बारे में आपको उनसे ही पूछना होगा।"
राजनीतिक बयानबाजी और चुप्पी पर सवाल
राजा कृष्णमूर्ति ने उन राजनीतिक नेताओं की भी आलोचना की जो ऐसी घटनाओं पर चुप्पी साध लेते हैं। उन्होंने कहा, "जब आप चुप रहते हैं, तो कई बार ऐसा लगता है कि आप जो हुआ उसे स्वीकार कर रहे हैं या उसका समर्थन कर रहे हैं।" उनका मानना है कि किसी भी समुदाय के खिलाफ नफरत का नेताओं को खुलकर विरोध करना चाहिए।
उन्होंने कुछ प्रभावशाली अमेरिकी नेताओं पर भारतीयों और एशियाई समुदायों के खिलाफ भड़काऊ बयानबाजी को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए कहा, "दुर्भाग्य से, इसमें हमारे देश के शीर्ष स्तर के कुछ नेताओं की भूमिका भी है, जो ऐसे माहौल को बढ़ावा दे रहे हैं।" उन्होंने कहा कि इस तरह की बयानबाजी आग में घी डालने का काम करती है, जो अंततः हिंसा को जन्म देती है।
जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर चिंता
कृष्णमूर्ति ने संघीय जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि घरेलू हिंसक उग्रवाद पर और ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने इस बात पर हैरानी जताई कि अगर मंदिर पर हमले की यह साजिश कथित तौर पर दो साल से चल रही थी, तो एजेंसियों को इसकी जानकारी पहले क्यों नहीं मिली? उनके मुताबिक, यह मामला दिखाता है कि ऐसी गतिविधियों का पता लगाने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं लगाए जा रहे हैं।
इनपुट: IANS



