रोशडेल ग्रूमिंग गैंग: कानूनी अड़चन के कारण सरगना शब्बीर अहमद को पाकिस्तान नहीं भेजा जा सका, ब्रिटेन कर रहा बदलाव पर विचार
ब्रिटेन में रोशडेल ग्रूमिंग गैंग के सरगना शब्बीर अहमद की रिहाई ने एक बड़ी कानूनी बहस छेड़ दी है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, 14 साल जेल में बिताने के बाद अहमद को पिछले हफ्ते रिहा कर दिया
ब्रिटेन में रोशडेल ग्रूमिंग गैंग के सरगना शब्बीर अहमद की रिहाई ने एक बड़ी कानूनी बहस छेड़ दी है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, 14 साल जेल में बिताने के बाद अहमद को पिछले हफ्ते रिहा कर दिया गया, लेकिन एक 55 साल पुराने कानून के कारण उसे पाकिस्तान निर्वासित नहीं किया जा सका है। अब ब्रिटिश सरकार इस कानूनी प्रावधान में बदलाव करने के विकल्पों पर विचार कर रही है।
अहमद को कई दुष्कर्म और यौन अपराधों के लिए दोषी ठहराया गया था, जिसके बाद उसकी ब्रिटिश नागरिकता भी छीन ली गई थी। इसके बावजूद, इमिग्रेशन एक्ट 1971 की एक कमी उसे निर्वासन से बचा रही है। यह कानून उन लोगों को सुरक्षा प्रदान करता है जो 1973 से पहले ब्रिटेन आए थे और कम से कम पांच साल तक वहां रहे। गृह सचिव शबाना महमूद इस समस्या से निपटने के लिए फास्ट-ट्रैक कानून या इमिग्रेशन बिल में संशोधन जैसे विकल्पों पर विचार कर रही हैं।
कानूनी पेंच और पीड़ितों की चिंता
शब्बीर अहमद, जिसकी उम्र 73 वर्ष है, को 2 जुलाई को जेल से रिहा किया गया। इससे पहले पैरोल के लिए उसकी तीन कोशिशें खारिज हो चुकी थीं, हाल ही में अक्टूबर 2024 में भी उसकी याचिका खारिज हुई थी। द गार्जियन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2023 की एक समीक्षा में उसे यौन अपराध दोहराने के लिए 'उच्च जोखिम' वाला व्यक्ति बताया गया था।
अहमद की रिहाई से पीड़ित दहशत में हैं। रूबी और एम्बर जैसी पीड़िताओं ने अपनी सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई है और सरकार से कानून में तत्काल बदलाव की अपील की है। एम्बर ने कहा कि रिहाई की खबर सुनकर वह बीमार महसूस कर रही हैं और सो नहीं पा रही हैं। वह उन लगभग 50 लड़कियों में से थीं, जिनका 2008 के आसपास अहमद और उसके नेटवर्क ने यौन शोषण और तस्करी की थी।
पाकिस्तान का रुख और मामले की पृष्ठभूमि
मामले में एक और पहलू यह है कि पाकिस्तान, शब्बीर अहमद को वापस लेने से इनकार कर रहा है। इसके बदले वह ब्रिटेन में रह रहे दो राजनीतिक असंतुष्टों के प्रत्यर्पण की मांग कर रहा है।
शब्बीर अहमद को 2022 में दो अलग-अलग मुकदमों में दुष्कर्म और यौन अपराधों का दोषी पाए जाने पर 22 साल की जेल हुई थी। ब्रिटेन में बाल यौन शोषण पर जून में जारी एक संसदीय जांच रिपोर्ट से पता चला कि दशकों में कम से कम 2,50,000 लड़कियों के साथ संगठित गिरोहों द्वारा बलात्कार, तस्करी और उत्पीड़न किया गया, जिनमें ज्यादातर दोषी पाकिस्तानी मुस्लिम मूल के थे। रिपोर्ट ने पुलिस, सामाजिक सेवाओं और सरकारों सहित ब्रिटिश संस्थानों पर इन गिरोहों को काम करने देने का आरोप लगाया, जिसे राज्य की "सक्रिय या निष्क्रिय सहमति" कहा गया।
इनपुट: IANS



