शनिवार, 15 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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ड्रग्स के खिलाफ बड़ी कार्रवाई: 13,000 करोड़ के सिंडिकेट सरगना समेत चार अंतरराष्ट्रीय तस्कर भारत लाए गए

अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स सिंडिकेट के खिलाफ एक बड़े ऑपरेशन में, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने चार कुख्यात तस्करों को सफलतापूर्वक भारत प्रत्यर्पित करा लिया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार…

ड्रग्स के खिलाफ बड़ी कार्रवाई: 13,000 करोड़ के सिंडिकेट सरगना समेत चार अंतरराष्ट्रीय तस्कर भारत लाए गए
(फोटो: IANS)

अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स सिंडिकेट के खिलाफ एक बड़े ऑपरेशन में, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने चार कुख्यात तस्करों को सफलतापूर्वक भारत प्रत्यर्पित करा लिया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, 'ऑपरेशन ग्लोबल हंट' के तहत की गई इस कार्रवाई में दाऊद इब्राहिम का एक करीबी सहयोगी और लगभग 13,000 करोड़ रुपए के ड्रग कार्टेल का कथित मास्टरमाइंड भी शामिल है।

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यह सफलता केंद्र सरकार की उस नीति का हिस्सा है जिसके तहत अब केवल ड्रग्स की खेप पकड़ने पर ही नहीं, बल्कि विदेशों में बैठकर पूरे नेटवर्क को चलाने वाले सरगनाओं को कानून के दायरे में लाने पर जोर दिया जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, सरकार के कूटनीतिक प्रयासों से कई देशों को यह समझाने में मदद मिली कि ऐसे अपराधियों को शरण देना गंभीर सुरक्षा खतरे पैदा कर सकता है।

कौन हैं ये चार प्रत्यर्पित तस्कर?

इस ऑपरेशन में जिन चार प्रमुख ड्रग तस्करों को भारत लाया गया है, उनमें शामिल हैं:

  • वीरेंद्र सिंह बसोया: उसे संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से प्रत्यर्पित किया गया है। बसोया को लगभग 13,000 करोड़ रुपए के अंतरराष्ट्रीय ड्रग कार्टेल का मास्टरमाइंड माना जाता है।
  • सलीम डोला: वह दाऊद इब्राहिम का करीबी सहयोगी है, जिसे मलेशिया में गिरफ्तार किया गया और तुर्किये के रास्ते भारत लाया गया।
  • प्रभदीप सिंह: इसका प्रत्यर्पण अजरबैजान से सुनिश्चित किया गया।
  • ऋतिक बजाज: सीमा पार लॉजिस्टिक्स सप्लायर, जिसे UAE से भारत लाया गया।

जांच का बदला तरीका और रणनीति

वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'नशामुक्त भारत' के संकल्प को साकार करने के लिए जांच एजेंसियों की रणनीति में बड़ा बदलाव आया है। अब NCB स्थानीय सप्लायरों, बिचौलियों और डीलरों से आगे बढ़कर अंतरराष्ट्रीय सरगनाओं पर ध्यान केंद्रित कर रही है।

एजेंसी अब 'टॉप-टू-बॉटम' और 'बॉटम-टू-टॉप' दोनों दृष्टिकोण अपनाती है। इसका मतलब है कि जांच नेटवर्क के शीर्ष पर बैठे सरगना से लेकर जमीनी स्तर के तस्करों तक और फिर नीचे से ऊपर की ओर, पूरे सिंडिकेट की हर कड़ी को खंगाला जाता है। इस रणनीति का मकसद सिर्फ तस्करों को पकड़ना नहीं, बल्कि पूरे ड्रग कार्टेल को ध्वस्त करना है।

एक अधिकारी ने बताया कि प्रत्यर्पण की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए मजबूत सबूतों के साथ अनुरोध भेजे जाते हैं। इनमें वित्तीय लेन-देन के रिकॉर्ड, डिजिटल सबूत और संगठित तस्करी में आरोपी की भूमिका से जुड़े विस्तृत दस्तावेज शामिल होते हैं, जिससे प्रत्यर्पण की प्रक्रिया आसान हो जाती है।

इनपुट: IANS

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News4Social नेशनल डेस्क

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