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तमिलनाडु: 15 विश्वविद्यालयों में कुलपति की कुर्सी खाली, उच्च शिक्षा पर मंडरा रहा संकट

तमिलनाडु का उच्च शिक्षा क्षेत्र एक गंभीर प्रशासनिक संकट से जूझ रहा है, क्योंकि राज्य के 15 विश्वविद्यालयों में स्थायी कुलपतियों (VC) के पद खाली पड़े हैं। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार…

तमिलनाडु: 15 विश्वविद्यालयों में कुलपति की कुर्सी खाली, उच्च शिक्षा पर मंडरा रहा संकट
(फोटो: IANS)

तमिलनाडु का उच्च शिक्षा क्षेत्र एक गंभीर प्रशासनिक संकट से जूझ रहा है, क्योंकि राज्य के 15 विश्वविद्यालयों में स्थायी कुलपतियों (VC) के पद खाली पड़े हैं। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस स्थिति ने इन संस्थानों में निर्णय लेने की प्रक्रिया, शोध कार्यों और समग्र शासन व्यवस्था को लेकर गहरी चिंता पैदा कर दी है।

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प्रभावित होने वाले प्रमुख संस्थानों में मद्रास विश्वविद्यालय, अन्नामलाई विश्वविद्यालय, मदुरै कामराज विश्वविद्यालय, भारथियार विश्वविद्यालय और तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय जैसे बड़े नाम शामिल हैं। समस्या यहीं खत्म नहीं होती; अगले महीने यह संकट और गहरा सकता है जब कराईकुडी स्थित अलगप्पा विश्वविद्यालय और तिरुनेलवेली के मनोनमनियम सुंदरनार विश्वविद्यालय के कुलपतियों का कार्यकाल समाप्त हो जाएगा, जिससे बिना स्थायी मुखिया वाले विश्वविद्यालयों की संख्या 17 हो जाएगी।

प्रशासनिक ढांचे पर व्यापक असर

यह संकट केवल कुलपति के पद तक ही सीमित नहीं है। कई विश्वविद्यालयों में रजिस्ट्रार, परीक्षा नियंत्रक, निदेशक और प्राचार्य जैसे अन्य महत्वपूर्ण प्रशासनिक पद भी लंबे समय से खाली हैं। उदाहरण के तौर पर, मदुरै कामराज विश्वविद्यालय एक साल से अधिक समय से इन प्रमुख पदों पर स्थायी अधिकारियों के बिना ही चल रहा है। इन रिक्तियों के कारण विश्वविद्यालयों के दैनिक कामकाज और अकादमिक गतिविधियों की रफ्तार धीमी पड़ गई है।

वैकल्पिक व्यवस्था और उसकी चुनौतियाँ

स्थायी कुलपतियों की अनुपस्थिति में, राज्य सरकार ने इन विश्वविद्यालयों के प्रशासन के लिए आईएएस अधिकारियों को संयोजक के रूप में नियुक्त किया है। हालांकि, इनमें से कई अधिकारी चेन्नई से ही दूरस्थ रूप से काम करते हैं और साथ में अन्य सरकारी जिम्मेदारियां भी संभाल रहे हैं। शिक्षाविदों ने इस व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल उठाए हैं। इसके अलावा, वरिष्ठ प्रोफेसरों को अतिरिक्त प्रशासनिक कार्यभार दिए जाने से शिक्षकों में असंतोष और वरिष्ठता को लेकर विवाद बढ़ रहे हैं, जिससे शिक्षण का माहौल प्रभावित हो रहा है।

नियुक्ति में देरी और भविष्य का रास्ता

कुलपति की नियुक्तियों में यह देरी पिछली सरकार के दौरान राज्यपाल और राज्य सरकार के बीच नियुक्ति के अधिकारों को लेकर हुए विवाद का परिणाम है। हालांकि, मौजूदा मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय और राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर के बीच बेहतर तालमेल की उम्मीद है, फिर भी नियुक्तियां अटकी हुई हैं। अब सभी की निगाहें सुप्रीम कोर्ट पर हैं, जहाँ 29 जुलाई, 2026 को कुलपति की शक्तियों से जुड़े एक अहम मामले पर सुनवाई होनी है। शीर्ष अदालत का फैसला राज्य की उच्च शिक्षा के भविष्य की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

इनपुट: IANS

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News4Social नेशनल डेस्क

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