शनिवार, 1 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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तमिलनाडु: बिजली के बढ़े बिलों पर भारी विरोध, TPDCL ने जांच के सख्त आदेश दिए

तमिलनाडु में बिजली के भारी-भरकम बिलों को लेकर आम लोगों की बढ़ती शिकायतों के बाद, तमिलनाडु पावर डिस्ट्रीब्यूशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (TPDCL) ने कड़ा रुख अपनाया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार…

तमिलनाडु: बिजली के बढ़े बिलों पर भारी विरोध, TPDCL ने जांच के सख्त आदेश दिए
(फोटो: IANS)

तमिलनाडु में बिजली के भारी-भरकम बिलों को लेकर आम लोगों की बढ़ती शिकायतों के बाद, तमिलनाडु पावर डिस्ट्रीब्यूशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (TPDCL) ने कड़ा रुख अपनाया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, कॉर्पोरेशन ने राज्य भर में बिलिंग प्रक्रिया की गहन जांच और गलतियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के आदेश जारी किए हैं। फील्ड अधिकारियों को साफ निर्देश दिया गया है कि वे बिलों का सही आकलन सुनिश्चित करें, अन्यथा अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए तैयार रहें।

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यह फैसला उस समय आया है जब राज्य में उपभोक्ताओं के बीच दो महीने के बढ़े हुए बिल, मीटर रीडिंग में देरी और सरकार की मुफ्त बिजली योजना का लाभ न मिल पाने जैसी समस्याओं को लेकर काफी नाराजगी है। इन शिकायतों के कारण टीवीके के नेतृत्व वाली राज्य सरकार के लिए एक राजनीतिक चुनौती भी खड़ी हो सकती है।

क्यों पड़ी सख्त कार्रवाई की ज़रूरत?

TPDCL ने अपने सभी सुपरिटेंडिंग इंजीनियरों को एक आंतरिक सर्कुलर जारी किया है। इसमें कहा गया है कि बार-बार मिल रही उपभोक्ता शिकायतों और निरीक्षण रिपोर्टों से बिलिंग प्रक्रिया में गंभीर खामियों का पता चला है। कॉर्पोरेशन ने माना कि गलत मीटर रीडिंग, खराब मीटर और प्रक्रियात्मक कमियों की वजह से घरेलू उपभोक्ताओं को बहुत ज़्यादा बिल भेजे गए हैं।

सर्कुलर में इस बात का भी ज़िक्र है कि निदेशक (वित्त) ने कई वितरण क्षेत्रों में असामान्य बिलिंग की घटनाओं पर चिंता जताई थी। उन्होंने चेतावनी दी थी कि ऐसी गलतियों से न केवल ग्राहकों का भरोसा टूट रहा है, बल्कि कंपनी की वित्तीय स्थिति पर भी बुरा असर पड़ रहा है।

लापरवाही या कर्मचारियों की कमी?

निरीक्षणों में यह भी पाया गया कि राजस्व पर्यवेक्षकों, मूल्यांकन पर्यवेक्षकों और सहायक लेखा अधिकारियों जैसे कर्मचारियों द्वारा निगरानी अपर्याप्त थी। साथ ही, खराब मीटर लंबे समय तक पकड़े नहीं जा सके, जिससे गलत बिल बनने का सिलसिला जारी रहा। इस समस्या से निपटने के लिए, कंपनी ने सभी सर्किलों को समय-समय पर औचक निरीक्षण और बड़े पैमाने पर सत्यापन अभियान चलाने का निर्देश दिया है।

हालांकि, कर्मचारी संघों का तर्क है कि इन समस्याओं की जड़ लापरवाही नहीं, बल्कि कर्मचारियों की भारी कमी है। तमिलनाडु बिजली कर्मचारी केंद्रीय संगठन के अध्यक्ष एस. कन्नन ने बताया कि मूल्यांकनकर्ताओं के 7,565 पदों में से लगभग 60 प्रतिशत और मूल्यांकन निरीक्षकों के 3,961 पदों में से करीब 42 प्रतिशत पद खाली हैं। उन्होंने कहा कि आउटसोर्स किए गए मीटर रीडरों पर बढ़ती निर्भरता ने भी बिलिंग की गलतियों को बढ़ाया है।

इनपुट: IANS

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News4Social नेशनल डेस्क

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