बुधवार, 29 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
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कावेरी जल विवाद: तमिलनाडु कांग्रेस प्रमुख ने कर्नाटक से पानी छोड़ने की मांग की, तनाव बढ़ने की चेतावनी दी

कावेरी जल को लेकर तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच एक बार फिर तनाव बढ़ता दिख रहा है। तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष मणिकम टैगोर ने कर्नाटक सरकार से आग्रह किया है कि वह कावेरी जल विनियमन समिति (CWRC) के…

कावेरी जल विवाद: तमिलनाडु कांग्रेस प्रमुख ने कर्नाटक से पानी छोड़ने की मांग की, तनाव बढ़ने की चेतावनी दी
(फोटो: IANS)

कावेरी जल को लेकर तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच एक बार फिर तनाव बढ़ता दिख रहा है। तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष मणिकम टैगोर ने कर्नाटक सरकार से आग्रह किया है कि वह कावेरी जल विनियमन समिति (CWRC) के आदेश का तत्काल पालन करे। उन्होंने चेतावनी दी है कि इस निर्देश में किसी भी तरह की देरी या इसे चुनौती देने से दोनों पड़ोसी राज्यों के बीच संबंध और बिगड़ सकते हैं।

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समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह मामला तब गरमाया जब कर्नाटक के जल संसाधन मंत्री के. रामलिंगा रेड्डी ने संकेत दिया कि उनका राज्य CWRC के हालिया आदेश के खिलाफ अपील कर सकता है। कर्नाटक का कहना है कि सूखे की स्थिति और जलाशयों में पानी की कमी के कारण वह तमिलनाडु को पानी देने की स्थिति में नहीं है। टैगोर ने इस बयान को 'गैर-जिम्मेदाराना' बताते हुए कहा कि यह ऐसे समय में अनावश्यक मनमुटाव पैदा कर रहा है जब सहयोग की आवश्यकता है।

किसानों की फसलें दांव पर

कांग्रेस नेता मणिकम टैगोर ने तमिलनाडु के किसानों की गंभीर स्थिति पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि पानी की कमी के कारण राज्य में 'कुरुवई' की खेती को पहले ही भारी नुकसान हो चुका है। उन्होंने चिंता जताई कि अगर कावेरी का पानी तुरंत नहीं छोड़ा गया तो आने वाली 'सांबा' फसल भी खतरे में पड़ जाएगी। टैगोर ने कहा, "कावेरी डेल्टा के किसान खेती जारी रखने के लिए बेसब्री से पानी का इंतजार कर रहे हैं।"

आदेश और पानी की कमी का गणित

मंगलवार को कावेरी जल विनियमन समिति ने कर्नाटक को निर्देश दिया था कि वह 29 जुलाई से 15 दिनों तक 3,500 क्यूसेक प्रति दिन की दर से तमिलनाडु के लिए कुल 4 टीएमसी पानी छोड़े। हालांकि, टैगोर द्वारा दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, 26 जुलाई तक तमिलनाडु को निर्धारित 35.391 टीएमसी पानी के मुकाबले केवल 3.543 टीएमसी पानी ही मिला है, जो कि देय मात्रा का महज़ 10.01 प्रतिशत है। उनके अनुसार, इस वजह से राज्य को मौजूदा जल वर्ष में कुल 9.46 टीएमसी पानी की कमी का सामना करना पड़ा है।

मणिकम टैगोर ने इस बात पर भी जोर दिया कि भारत के संघीय ढांचे की भावना को बनाए रखने के लिए न्यायिक और वैधानिक आदेशों का पालन करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि कानूनी रूप से बाध्यकारी फैसलों का सम्मान करना ही पानी के समान बंटवारे और राज्यों के बीच सद्भाव सुनिश्चित करने का एकमात्र तरीका है।

इनपुट: IANS

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News4Social नेशनल डेस्क

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