मंगलवार, 11 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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माओवाद का गढ़ रहे करेगुट्टा में 50 साल बाद शांति, तेलंगाना DGP ने फहराया तिरंगा, विकास का वादा

कभी माओवादियों के गढ़ के रूप में कुख्यात रहे तेलंगाना-छत्तीसगढ़-ओडिशा सीमा पर स्थित करेगुट्टा इलाके में अब शांति लौट रही है। इसी ऐतिहासिक बदलाव के प्रतीक के रूप में, सोमवार को तेलंगाना के पुलिस…

माओवाद का गढ़ रहे करेगुट्टा में 50 साल बाद शांति, तेलंगाना DGP ने फहराया तिरंगा, विकास का वादा
(फोटो: IANS)

कभी माओवादियों के गढ़ के रूप में कुख्यात रहे तेलंगाना-छत्तीसगढ़-ओडिशा सीमा पर स्थित करेगुट्टा इलाके में अब शांति लौट रही है। इसी ऐतिहासिक बदलाव के प्रतीक के रूप में, सोमवार को तेलंगाना के पुलिस महानिदेशक (DGP) सी.वी. आनंद ने वहां तिरंगा फहराया और सफेद कबूतर उड़ाए। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारियों ने इसे वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित रहे इस क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत बताया है।

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अपने इस दौरे के दौरान DGP आनंद ने दूर-दराज के जंगली इलाके में चल रहे सड़क निर्माण कार्यों का जायजा लिया। इस मौके पर पुलिस, CRPF, वन और राजस्व सहित कई सरकारी विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे, जो माओवादी गतिविधियों में कमी के बाद विकास पर प्रशासन के बढ़ते ध्यान को दर्शाता है।

माओवादियों के खिलाफ सफल ऑपरेशन

मीडिया से बातचीत में डीजीपी ने इलाके में शांति की बहाली का श्रेय सुरक्षाबलों के संयुक्त प्रयासों को दिया। उन्होंने कहा, "तेलंगाना पुलिस, ग्रेहाउंड्स, स्पेशल पुलिस फोर्स, CRPF, कोबरा यूनिट और छत्तीसगढ़ पुलिस के आपसी सहयोग से चलाए गए ऑपरेशन ने इलाके में माओवादी गतिविधियों को काफी कमजोर कर दिया है।" उन्होंने बताया कि 'ऑपरेशन कगार' के दौरान लगभग 700 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया, कई बड़े नेता मुठभेड़ों में मारे गए और अन्य मुख्यधारा में लौट आए हैं। उनके मुताबिक, अब देश भर में सेंट्रल कमेटी के कुछ ही नेता सक्रिय बचे हैं।

विकास और पुनर्वास पर जोर

डीजीपी ने कहा कि राज्य सरकार आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों के पुनर्वास के लिए प्रतिबद्ध है, जिसके तहत उन्हें आर्थिक मदद, ज़मीन और रोजगार के अवसर दिए जा रहे हैं। साथ ही, समाज में उनकी वापसी पर भी नज़र रखी जा रही है। उन्होंने करेगुट्टा में पर्यटन की अपार संभावनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार पर्यावरण और कानूनी नियमों के दायरे में इस इलाके का विकास करेगी। सड़क संपर्क को बेहतर बनाने के लिए पामुरु से चलामादावा तक तारकोल की सड़क बन चुकी है और जल्द ही बीटी सड़क का काम भी शुरू होगा। साथ ही, बिजली और मोबाइल कनेक्टिविटी जैसी बुनियादी सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी।

इस दौरे में डीजीपी ने पामुरु कैंप के पास रहने वाले गुट्टी कोया परिवारों से मुलाकात की और उन्हें ज़रूरी सामान वितरित करते हुए सरकार की तरफ से हरसंभव मदद का आश्वासन दिया। उन्होंने दशकों से माओवाद-विरोधी अभियानों में राज्य पुलिस का साथ देने के लिए CRPF की 196 बटालियन के जवानों की भी सराहना की।

इनपुट: IANS

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News4Social नेशनल डेस्क

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