तमिलनाडु: राजस्व प्रमाण पत्र बनवाना होगा आसान, सरकार जल्द खत्म करेगी एक अहम चरण
तमिलनाडु में जल्द ही आय, जाति और निवास जैसे महत्वपूर्ण राजस्व प्रमाण पत्र बनवाना आसान और तेज हो सकता है। राज्य सरकार प्रमाण पत्र जारी करने की मौजूदा लंबी प्रक्रिया को छोटा करने की तैयारी कर रही है…
तमिलनाडु में जल्द ही आय, जाति और निवास जैसे महत्वपूर्ण राजस्व प्रमाण पत्र बनवाना आसान और तेज हो सकता है। राज्य सरकार प्रमाण पत्र जारी करने की मौजूदा लंबी प्रक्रिया को छोटा करने की तैयारी कर रही है, जिससे नागरिकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस प्रशासनिक सुधार के तहत मंजूरी की प्रक्रिया से एक पूरे चरण को हटाया जा सकता है, जिससे देरी कम होगी और भ्रष्टाचार पर भी लगाम लगेगी।
इस बदलाव का औपचारिक ऐलान आगामी विधानसभा सत्र में होने की संभावना है। इसका मुख्य उद्देश्य कल्याणकारी योजनाओं, शिक्षा और रोजगार के लिए जरूरी दस्तावेजों को नागरिकों तक जल्दी पहुंचाना है।
क्या है मौजूदा प्रक्रिया की समस्या?
अभी तक, इन प्रमाणपत्रों के लिए आवेदन कई स्तरों से होकर गुजरता है, जिस वजह से इसमें काफी समय लगता है और भ्रष्टाचार की शिकायतें भी आती हैं। वर्तमान व्यवस्था में, ई-सेवा केंद्र से मिले आवेदन को पहले ग्राम प्रशासनिक अधिकारी (VAO) फील्ड वेरिफिकेशन के लिए भेजते हैं। इसके बाद राजस्व निरीक्षक (Revenue Inspector) इसकी जांच करते हैं और फिर आवेदन हेडक्वार्टर डिप्टी तहसीलदार या डिप्टी तहसीलदार के पास जाता है। अंत में, यह तहसीलदार के पास अंतिम मंजूरी के लिए पहुंचता है।
प्रस्तावित नई व्यवस्था में क्या बदलेगा?
प्रस्तावित नई तीन-चरणीय प्रणाली में डिप्टी तहसीलदार के स्तर को पूरी तरह खत्म कर दिया जाएगा। अब ग्राम प्रशासनिक अधिकारी के सत्यापन और राजस्व निरीक्षक की जांच के बाद आवेदन सीधे तहसीलदार को अंतिम मंजूरी के लिए भेज दिया जाएगा। अधिकारियों का मानना है कि एक चरण कम होने से न केवल समय की बचत होगी, बल्कि प्रशासनिक क्षमता और जवाबदेही भी बढ़ेगी।
कर्मचारी संघ का सुझाव और सरकार का लक्ष्य
तमिलनाडु ग्राम प्रशासनिक अधिकारी संघ ने इस प्रस्ताव का स्वागत किया है, लेकिन साथ ही प्रक्रिया को और सरल बनाने का सुझाव भी दिया है। संघ के प्रदेश अध्यक्ष आर. अरुलराज ने कहा, "दो-चरणीय प्रक्रिया पर भी विचार किया जा सकता है, जिसमें VAO या राजस्व निरीक्षक के सत्यापन के बाद आवेदन सीधे तहसीलदार को मंजूरी के लिए भेजा जाए।" उनका तर्क है कि इससे प्रक्रिया और तेज होगी। सरकार के सूत्रों के मुताबिक, यह कदम राजस्व प्रशासन को आधुनिक बनाने और नागरिक-केंद्रित सेवाओं को बेहतर बनाने की एक बड़ी पहल का हिस्सा है।
इनपुट: IANS



