तमिलनाडु में साइबर अपराधों पर नकेल: चेन्नई में 24 घंटे काम करने वाला कमांड सेंटर शुरू
तमिलनाडु सरकार ने राज्य में बढ़ते और जटिल होते साइबर अपराधों से निपटने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, चेन्नई स्थित साइबर क्राइम विंग के मुख्यालय को अब एक उन्न…
तमिलनाडु सरकार ने राज्य में बढ़ते और जटिल होते साइबर अपराधों से निपटने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, चेन्नई स्थित साइबर क्राइम विंग के मुख्यालय को अब एक उन्नत राज्य-स्तरीय कमांड सेंटर में बदल दिया गया है, जिसे 'तमिलनाडु राज्य साइबर अपराध समन्वय केंद्र' (TN-S4C) नाम दिया गया है।
यह नया केंद्र अशोक नगर के पुलिस ट्रेनिंग कॉलेज कॉम्प्लेक्स से संचालित होगा और इसका उद्देश्य ऑनलाइन धोखाधड़ी पर तुरंत कार्रवाई करना, साइबर खतरों पर लगातार नजर रखना और साइबर पेट्रोलिंग को मजबूत करना है। 28 जुलाई को जारी सरकारी आदेश और 12 अगस्त को गजट में प्रकाशित सूचना के बाद इस 24x7 काम करने वाले हब ने आकार लिया है। यह केंद्र राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) की निगरानी में काम करेगा।
कैसे काम करेगा यह नया केंद्र?
TN-S4C, 'भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र' के लिए राज्य की नोडल एजेंसी के रूप में भी कार्य करेगा। यह बैंकों, दूरसंचार कंपनियों, इंटरनेट सेवा प्रदाताओं (ISPs), CERT-In और अन्य केंद्रीय व राज्य एजेंसियों के साथ मिलकर काम करेगा। संगठित साइबर अपराध, रैंसमवेयर हमले, क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े अपराध और बड़े पैमाने पर वित्तीय धोखाधड़ी जैसे अंतरराज्यीय या अंतरराष्ट्रीय मामलों को भी यही केंद्र संभालेगा।
इसके संचालन को सुचारू बनाने के लिए इसे छह प्रमुख विभागों में बांटा गया है:
- राज्य साइबर कमांड सेंटर
- राज्य साइबर अपराध जांच केंद्र
- साइबर अरंगम (जागरूकता और प्रशिक्षण इकाई)
- उन्नत साइबर फोरेंसिक इकाई
- प्रशासन प्रभाग
- साइबर सुरक्षा प्रभाग
जांच, जागरूकता और फॉरेंसिक पर जोर
कमांड सेंटर लोकप्रिय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 का संचालन करेगा और सिम कार्ड या अवैध ऑनलाइन सामग्री को ब्लॉक करने जैसी कार्रवाइयों में समन्वय स्थापित करेगा। यह सोशल मीडिया इंटेलिजेंस और डार्क वेब पर भी नजर रखेगा। जांच केंद्र 1 लाख रुपये से अधिक के वित्तीय नुकसान वाले मामलों के लिए ई-पुलिस स्टेशन के रूप में काम करेगा।
सरकार ने मुख्य कमांड और जांच इकाइयों के लिए 172 पुलिस पदों को मंजूरी दी है, जबकि साइबर अरंगम में 28 कर्मी तैनात होंगे जो जन जागरूकता कार्यक्रम, पुलिस प्रशिक्षण और डिजिटल साक्षरता पहल चलाएंगे। इसके अलावा, डार्क वेब जांच और मैलवेयर विश्लेषण जैसे विशेष क्षेत्रों के लिए छह बाहरी विशेषज्ञों को भी शामिल किया गया है। सरकार ने 1930 हेल्पलाइन के विस्तार के लिए 8.88 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं।
इनपुट: IANS



