मंगलवार, 28 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
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तमिलनाडु से निर्माण सामग्री बाहर ले जाने पर तीन महीने की रोक, जानिए सरकार ने क्यों लिया यह फैसला

तमिलनाडु में चल रही बड़ी ढांचागत और आवासीय परियोजनाओं के लिए निर्माण सामग्री की बढ़ती मांग को देखते हुए राज्य सरकार ने एक अहम फैसला लिया है। सरकार ने राज्य से बजरी, कटे हुए पत्थर, एम-रेत और मेटल जेली…

तमिलनाडु से निर्माण सामग्री बाहर ले जाने पर तीन महीने की रोक, जानिए सरकार ने क्यों लिया यह फैसला
(फोटो: IANS)

तमिलनाडु में चल रही बड़ी ढांचागत और आवासीय परियोजनाओं के लिए निर्माण सामग्री की बढ़ती मांग को देखते हुए राज्य सरकार ने एक अहम फैसला लिया है। सरकार ने राज्य से बजरी, कटे हुए पत्थर, एम-रेत और मेटल जेली जैसी निर्माण सामग्रियों को दूसरे राज्यों में ले जाने पर तीन महीने की अस्थायी रोक लगा दी है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, यह कदम राज्य में इन सामग्रियों की कमी और बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

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यह प्रतिबंध पुडुचेरी को छोड़कर अन्य सभी पड़ोसी राज्यों के लिए लागू होगा। भूविज्ञान और खनन विभाग के निदेशक प्रभु शंकर द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि यह निर्णय तमिलनाडु में निर्माण सामग्री की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है।

प्रतिबंध के पीछे के मुख्य कारण

सरकार ने इस फैसले के पीछे कई वजहें बताई हैं। राज्य में सार्वजनिक अवसंरचना और आवास परियोजनाओं में तेजी के कारण निर्माण सामग्री की मांग में भारी वृद्धि हुई है। इसके साथ ही, बड़ी मात्रा में सामग्री पड़ोसी राज्यों में भेजी जा रही थी, जिससे तमिलनाडु में ही इनकी कमी होने लगी। इस असंतुलन से कृत्रिम कमी, कीमतों में वृद्धि और निर्माण कार्यों में बाधा जैसी समस्याएं पैदा हो रही थीं।

इसके अलावा, सरकार ने सड़क सुरक्षा और अवैध खनन को भी एक बड़ी चिंता का विषय माना है। अधिकारियों के अनुसार, निर्माण सामग्री ले जाने वाले भारी ट्रकों और बहु-धुरी वाहनों की लगातार आवाजाही से स्थानीय सड़कें खराब हो रही थीं और सड़क दुर्घटनाओं में भी वृद्धि हो रही थी। बढ़ती मांग के कारण अवैध खनन और अनुमत सीमा से अधिक खनिजों का निष्कर्षण भी बढ़ गया था, जो पर्यावरण के लिए एक गंभीर खतरा है।

सख्त निगरानी के निर्देश

आदेश में स्पष्ट किया गया है कि पड़ोसी राज्यों जैसे कर्नाटक, केरल और आंध्र प्रदेश में निर्माण सामग्री की कोई खास कमी नहीं है, फिर भी तमिलनाडु से हो रहे परिवहन ने यहां मांग-आपूर्ति का संतुलन बिगाड़ दिया था। इस अस्थायी प्रतिबंध का उद्देश्य प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक दोहन को रोकना और राज्य की विकास परियोजनाओं के लिए पर्याप्त सामग्री उपलब्ध कराना है।

सभी जिला कलेक्टरों, पुलिस अधीक्षकों और सीमावर्ती जिलों के अधिकारियों को इस प्रतिबंध को सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया गया है। संबंधित विभागों को अंतर्राज्यीय चौकियों पर कड़ी निगरानी रखने को कहा गया है, ताकि कोई भी अनधिकृत खेप राज्य से बाहर न जा सके। सरकार ने चेतावनी दी है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

इनपुट: IANS

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News4Social नेशनल डेस्क

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