तांबरम में जलभराव की समस्या होगी खत्म? 111 करोड़ रुपये की स्टॉर्म वॉटर ड्रेन परियोजना को मंजूरी का इंतजार
उत्तर-पूर्वी मानसून की दस्तक से पहले, तमिलनाडु के तांबरम नगर निगम ने शहर के निचले इलाकों में हर साल होने वाले जलभराव की समस्या के स्थायी समाधान के लिए एक बड़ी पहल की है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट…
उत्तर-पूर्वी मानसून की दस्तक से पहले, तमिलनाडु के तांबरम नगर निगम ने शहर के निचले इलाकों में हर साल होने वाले जलभराव की समस्या के स्थायी समाधान के लिए एक बड़ी पहल की है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, निगम ने 111.08 करोड़ रुपये की एक विस्तृत स्टॉर्म वॉटर ड्रेन परियोजना का प्रस्ताव तैयार कर राज्य सरकार को भेजा है। इस योजना का उद्देश्य उन क्षेत्रों को राहत पहुंचाना है, जहां मध्यम बारिश के बाद भी गंभीर जलभराव हो जाता है।
यह व्यापक प्रस्ताव पिछले कुछ मानसून के दौरान किए गए विस्तृत फील्ड निरीक्षण और बाढ़ मानचित्रण (फ्लड मैपिंग) के गहन विश्लेषण पर आधारित है। निगम आयुक्त एस. बालाचंदर ने बताया कि जलभराव के पुराने रिकॉर्ड और ड्रेनेज सिस्टम की मौजूदा कमियों का अध्ययन कर प्रभावित इलाकों की पहचान की गई है।
परियोजना का खाका और प्रभावित क्षेत्र
प्रस्तावित परियोजना में कुल 30.37 किलोमीटर लंबाई वाले 40 स्टॉर्म वॉटर ड्रेन का निर्माण शामिल है। इससे गुडविल नगर, समथुवा पेरियार नगर, जज कॉलोनी और चितलापक्कम के कुछ हिस्सों समेत कई अन्य इलाकों को फायदा मिलने की उम्मीद है, जहां हर साल बारिश के दौरान जन-जीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है। गुडविल नगर और आसपास के इलाकों में तो हालात ऐसे हैं कि कुछ घंटों की बारिश में ही सड़कें पानी में डूब जाती हैं, जिससे यातायात और संपत्ति का भारी नुकसान होता है।
इस पूरी परियोजना को दो चरणों में बांटा गया है:
- पहला चरण: इसमें 95.51 करोड़ रुपये की लागत से 23.1 किलोमीटर लंबे 25 स्टॉर्म वॉटर ड्रेन का निर्माण होगा।
- दूसरा चरण: इसके तहत 15.57 करोड़ रुपये खर्च कर 7.27 किलोमीटर के 15 ड्रेन कार्य पूरे किए जाएंगे।
पुरानी परियोजनाओं पर उठे सवाल
यह पहली बार नहीं है कि तांबरम में जलभराव रोकने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। इससे पहले भी राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (SDRF) के तहत 37.59 करोड़ रुपये की लागत से 15 किलोमीटर लंबे स्टॉर्म वॉटर ड्रेन का निर्माण पूरा किया गया था। हालांकि, स्थानीय निवासियों और नागरिक संगठनों का कहना है कि इन कार्यों से अपेक्षित परिणाम नहीं मिले। उनका आरोप है कि कई ड्रेनों का निर्माण सही ढलान (ग्रेडिएंट) के बिना किया गया, जिससे पानी का प्राकृतिक प्रवाह रुक गया। नागरिक कार्यकर्ताओं ने नई परियोजना के निर्माण कार्य की कड़ी निगरानी की मांग की है और साथ ही प्राकृतिक जलमार्गों को पुनर्जीवित करने और अतिक्रमण हटाने की भी अपील की है, ताकि सार्वजनिक धन का सही उपयोग हो सके।
निगम अधिकारियों के अनुसार, नए ड्रेनेज सिस्टम का डिजाइन इस तरह बनाया गया है कि यह मुख्य जल निकासी तंत्र से प्रभावी ढंग से जुड़ सके, जिससे भारी बारिश में भी पानी तेजी से निकल जाए। राज्य सरकार से प्रशासनिक और वित्तीय मंजूरी मिलते ही निगम इस काम को प्राथमिकता के आधार पर शुरू करना चाहता है, ताकि मानसून के चरम पर पहुंचने से पहले शहर की तैयारियों को मजबूत किया जा सके।
इनपुट: IANS



