चीन के हमले की आशंका: ताइवान ड्रोन और मानवरहित नौकाओं से बना रहा है 'रक्षा कवच'
चीन के किसी भी संभावित हमले से अपनी रक्षा के लिए ताइवान बड़े पैमाने पर तैयारी कर रहा है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, ताइपे अपनी सैन्य रणनीति में बड़ा बदलाव करते हुए ड्रोन और बिना चालक…
चीन के किसी भी संभावित हमले से अपनी रक्षा के लिए ताइवान बड़े पैमाने पर तैयारी कर रहा है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, ताइपे अपनी सैन्य रणनीति में बड़ा बदलाव करते हुए ड्रोन और बिना चालक वाली हमलावर नौकाओं का एक विशाल बेड़ा तैयार कर रहा है। इस रणनीति का मकसद चीन की किसी भी सैन्य टुकड़ी को ताइवान की ओर बढ़ने से पहले ही खोजकर उस पर हमला करना है।
यह रणनीति यूक्रेन युद्ध के अनुभवों से प्रेरित है, जहाँ कम लागत वाले ड्रोन का इस्तेमाल कर एक छोटे देश ने कहीं ज़्यादा शक्तिशाली प्रतिद्वंद्वी का मुक़ाबला किया। ताइवान भी इसी 'डेविड बनाम गोलियथ' की तर्ज पर अपनी सुरक्षा को मज़बूत कर रहा है। इस योजना को विकसित करने वाले अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने इसे 'हेलस्केप' (नरक का दृश्य) नाम दिया है। इसका लक्ष्य ड्रोन, मिसाइलों और तोपखाने के ज़रिए हमलावर सेना के लिए इतना बड़ा ख़तरा पैदा करना है कि चीन हमला करने के विचार से ही पीछे हट जाए।
ड्रोन उत्पादन और सैन्य लक्ष्य
इस योजना के तहत ताइवान ने महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किए हैं। सरकार का इरादा 2030 तक हर महीने 1,00,000 ड्रोन बनाने का है, जिनमें से लगभग आधे निर्यात किए जाएँगे। इसके अलावा, ताइवानी सेना 2,10,000 हवाई और समुद्री ड्रोन हासिल करने की योजना पर भी काम कर रही है। चीन, जो ताइवान को अपना हिस्सा मानता है, वह भी ड्रोन और उन्हें निष्क्रिय करने वाली तकनीक में भारी निवेश कर रहा है।
विशेषज्ञों की राय और चुनौतियाँ
ऑस्ट्रेलिया के सेवानिवृत्त मेजर जनरल मिक रायन के मुताबिक, यूक्रेन की लंबी दूरी के हमलों में सफलता यह दिखाती है कि अगर चीन समुद्र के रास्ते हमला करता है, तो ताइवान भी चीन के बंदरगाहों से निकलने वाले जहाज़ों को निशाना बना सकता है। हालांकि, रिपोर्ट में ज़ोर दिया गया है कि सिर्फ़ ड्रोन ख़रीदना काफ़ी नहीं होगा। ताइवान को अपनी सैन्य संरचना, प्रशिक्षण और युद्ध की रणनीतियों में भी बड़े बदलाव करने होंगे। हाल ही में, ताइवान ने एक 'लिटोरल कॉम्बैट कमांड' का गठन किया है, जो ड्रोन, मोबाइल मिसाइल सिस्टम और तोपखाने को एकीकृत कर तटीय सुरक्षा को मज़बूत करेगा।
इनपुट: IANS



