गुजरात: गिर के बाहर तटीय शेर पालतू नहीं, जंगली जानवरों का कर रहे शिकार - नई स्टडी में खुलासा
गुजरात के तटीय इलाकों में बस चुके एशियाई शेरों के खान-पान को लेकर एक दिलचस्प वैज्ञानिक अध्ययन सामने आया है। इस रिसर्च ने उस आम धारणा को बदला है कि गिर के जंगल से बाहर निकले शेर मुख्य रूप से मवेशियों…
गुजरात के तटीय इलाकों में बस चुके एशियाई शेरों के खान-पान को लेकर एक दिलचस्प वैज्ञानिक अध्ययन सामने आया है। इस रिसर्च ने उस आम धारणा को बदला है कि गिर के जंगल से बाहर निकले शेर मुख्य रूप से मवेशियों पर निर्भर हैं। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, अध्ययन में पाया गया है कि इन शेरों के भोजन का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा जंगली शिकार से आता है, जिसमें नीलगाय और जंगली सूअर प्रमुख हैं।
यह स्टडी अंतरराष्ट्रीय पीयर-रिव्यूड जर्नल 'कंजर्वेशन' में प्रकाशित हुई है। इसका शीर्षक 'सौराष्ट्र, गुजरात, भारत के कोस्टल इकोसिस्टम में एशियाई शेरों का डाइटरी पैटर्न' है। रिसर्च के लिए शोधकर्ताओं ने मार्च और अप्रैल 2024 के दौरान जूनागढ़, गिर सोमनाथ, अमरेली, भावनगर और पोरबंदर जैसे तटीय जिलों से शेरों के मल के 160 सैंपल इकट्ठा कर उनका विश्लेषण किया।
नीलगाय बनी मुख्य शिकार
अध्ययन के सह-लेखक और जूनागढ़ सर्कल के वन संरक्षक मोहन राम ने बताया कि विश्लेषण में शेरों के आहार में जंगली शिकार की हिस्सेदारी 64% और पालतू पशुओं की 31% पाई गई। उन्होंने कहा, "इस्तेमाल किए गए बायोमास के मामले में, जंगली शिकार का हिस्सा 70 प्रतिशत था, जबकि जानवरों का हिस्सा 30 प्रतिशत था।"
रिसर्च के मुताबिक, सभी शिकार प्रजातियों में नीलगाय शेरों का सबसे प्रमुख भोजन बनकर उभरी है, जो उनके कुल बायोमास का 51 प्रतिशत यानी आधे से भी ज़्यादा है। जंगली सूअर दूसरे और मवेशी तीसरे स्थान पर रहे। यह परिणाम शोधकर्ताओं की उस प्रारंभिक सोच के विपरीत था कि इंसानी बस्तियों के पास रहने के कारण शेर मवेशियों पर ज़्यादा निर्भर होंगे।
किसानों को भी फायदा
अध्ययन से यह भी पता चला है कि गिर के बाहर शेरों की मौजूदगी किसानों के लिए भी फायदेमंद साबित हो रही है। राज्य के वन और पर्यावरण मंत्री अर्जुन मोढवाडिया के अनुसार, "रिसर्च स्टडी से पता चलता है कि गिर के जंगलों के बाहर शेरों की आबादी नीलगाय और जंगली सूअरों का शिकार करके किसानों को फायदा पहुंचा रही है। ये दोनों ही फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं।"
गौरतलब है कि 2025 में हुए 16वें शेर जनसंख्या अनुमान के अनुसार, राज्य में एशियाई शेरों की कुल आबादी 891 तक पहुंच गई है। गुजरात का तटीय पारिस्थितिकी तंत्र अब 100 से अधिक शेरों की तीन महत्वपूर्ण सैटेलाइट आबादी का घर है, जो प्रजाति के सफल विस्तार को दर्शाता है। अध्ययन इस बात पर जोर देता है कि इन संरक्षित क्षेत्रों के बाहर शेरों के अस्तित्व के लिए जंगली शिकार की आबादी को बनाए रखना महत्वपूर्ण है।
इनपुट: IANS



