श्रीलंकाई रत्न उद्योग में चीन की बढ़ती पैठ, मुनाफ़े को लेकर देश में चिंता
दुनिया के सबसे कीमती रत्नों के भंडारों में से एक, श्रीलंका में इस बात पर बहस छिड़ गई है कि उसके प्राकृतिक खजाने का असली आर्थिक लाभ किसे मिल रहा है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, देश के रत्न कारोबार…
दुनिया के सबसे कीमती रत्नों के भंडारों में से एक, श्रीलंका में इस बात पर बहस छिड़ गई है कि उसके प्राकृतिक खजाने का असली आर्थिक लाभ किसे मिल रहा है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, देश के रत्न कारोबार में चीन समेत विदेशी खरीदारों की बढ़ती मौजूदगी ने स्थानीय खनिकों और व्यापारियों के लिए चिंताएँ बढ़ा दी हैं, जिन्हें अक्सर आय में उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ता है।
विशेषज्ञों की चिंता सिर्फ़ इस बात को लेकर नहीं है कि चीनी व्यापारी श्रीलंका से रत्न खरीद रहे हैं, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय व्यापार एक सामान्य गतिविधि है। असली मुद्दा यह है कि जब इन रत्नों को बिना तराशे या पॉलिश किए निर्यात कर दिया जाता है, तो मूल्य संवर्धन (value addition) का बड़ा हिस्सा श्रीलंका से बाहर होता है। इसका सीधा मतलब है कि रत्नों के अंतिम खुदरा मूल्य से होने वाला भारी मुनाफ़ा भी दूसरे देशों को मिलता है।
मुनाफ़े की दौड़ में कैसे पिछड़ रहा है श्रीलंका?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन के बीजिंग, शंघाई, शेनझेन, ग्वांगझू और हांगकांग जैसे शहर श्रीलंकाई नीलम और अन्य रंगीन रत्नों के प्रमुख खरीदार बनकर उभरे हैं। चीनी खरीदार खास तौर पर बिना तराशे हुए या बिना उपचारित (untreated) प्राकृतिक रत्नों में गहरी रुचि रखते हैं। इनमें उच्च गुणवत्ता वाले नीले नीलम और माणिक सबसे ज़्यादा लोकप्रिय हैं। एक नया चलन यह भी देखा जा रहा है कि विदेशी खरीदार लागत कम करने के लिए सीधे खनन क्षेत्रों और उत्पादन केंद्रों से खरीदारी कर रहे हैं।
जानकारों का मानना है कि अगर श्रीलंका को अपने प्राकृतिक संसाधनों से अधिकतम लाभ कमाना है, तो उसे देश के भीतर ही रत्नों की कटाई, पॉलिशिंग, ब्रांडिंग, प्रमाणन और आभूषण निर्माण पर ज़ोर देना होगा। इन प्रक्रियाओं से न केवल रोज़गार पैदा होता है, बल्कि तकनीकी विशेषज्ञता, कर राजस्व और विदेशी मुद्रा भी बढ़ती है।
श्रीलंका का रत्न भंडार और निर्यात
श्रीलंका पूरी दुनिया में अपने नीले नीलम, पदपरादशा नीलम, माणिक, स्पिनेल, गार्नेट, जिरकॉन और कैट्स आई क्राइसोबेरील जैसे रत्नों के लिए मशहूर है। श्रीलंका के निर्यात विकास बोर्ड के अनुसार, देश उच्च गुणवत्ता वाले नीले नीलम के अलावा लगभग 75 अन्य किस्मों के रत्नों का भी निर्यात करता है। प्राकृतिक और बिना किसी कृत्रिम उपचार वाले रत्नों की गुणवत्ता ने इसे वैश्विक खरीदारों के लिए एक प्रमुख केंद्र बना दिया है। सेरेंडिब ब्लू जेम डेटा हब द्वारा प्रकाशित आँकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024 में देश का रत्न और आभूषण निर्यात लगभग 430 मिलियन डॉलर रहा।
इनपुट: IANS



