शनिवार, 22 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
राजनीति

पुलवामा आतंकी हमला: आरोपी इंशा जान की ज़मानत अर्ज़ी ख़ारिज, NIA कोर्ट ने कहा- आरोप प्रथम दृष्टया सही

जम्मू: साल 2019 में हुए पुलवामा आतंकी हमले के मामले में एक अहम घटनाक्रम सामने आया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, जम्मू की विशेष राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) अदालत ने आरोपी इंशा जान उर्फ…

पुलवामा आतंकी हमला: आरोपी इंशा जान की ज़मानत अर्ज़ी ख़ारिज, NIA कोर्ट ने कहा- आरोप प्रथम दृष्टया सही
(फोटो: IANS)

जम्मू: साल 2019 में हुए पुलवामा आतंकी हमले के मामले में एक अहम घटनाक्रम सामने आया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, जम्मू की विशेष राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) अदालत ने आरोपी इंशा जान उर्फ इंशा तारिक की ज़मानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत का मानना है कि रिकॉर्ड पर मौजूद सबूतों से उसके खिलाफ लगे आरोप प्रथम दृष्टया सही प्रतीत होते हैं। इस भीषण हमले में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के 40 जवान शहीद हो गए थे।

विज्ञापन

विशेष न्यायाधीश प्रेम सागर ने 20 अगस्त को 15 पन्नों का आदेश सुनाया। इस आदेश में कहा गया है कि गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) की धारा 43-डी(5) के तहत लगाई गई वैधानिक रोक भी आरोपी पर लागू होती है, जो इस स्तर पर उसकी ज़मानत पर रिहाई को रोकती है।

आरोपी पर लगे हैं गंभीर आरोप

एनआईए के आरोपपत्र के अनुसार, इंशा जान कथित तौर पर आतंकी साज़िश में शामिल थी। वह पाकिस्तानी आतंकवादी मोहम्मद उमर फारूक के लगातार संपर्क में थी, जिसने एक अन्य पाकिस्तानी आतंकवादी मोहम्मद कामरान अली के साथ मिलकर पुलवामा हमले की योजना बनाई थी। बाद में सुरक्षा बलों ने अलग-अलग मुठभेड़ों में इन दोनों को मार गिराया था।

आरोप है कि इंशा ने इन दोनों आतंकवादियों और जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के अन्य सदस्यों को भोजन, आश्रय और दूसरी लॉजिस्टिक सहायता प्रदान की थी। इसके अलावा, आत्मघाती हमलावर आदिल अहमद डार का वीडियो, जो 14 फरवरी 2019 के हमले के बाद वायरल हुआ था, कथित तौर पर 28 और 29 जनवरी को इंशा के घर पर ही रिकॉर्ड किया गया था।

गिरफ्तारी और मुकदमा

दक्षिण कश्मीर के पुलवामा जिले के हरकीपोरा गांव की रहने वाली इंशा जान को उनके पिता पीर तारिक अहमद शाह के साथ 3 मार्च, 2020 को गिरफ्तार किया गया था। उन पर रणबीर दंड संहिता (RPC), यूएपीए, शस्त्र अधिनियम और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत मुकदमा चल रहा है। अदालत ने 10 दिसंबर, 2022 को उनके खिलाफ आरोप तय किए थे।

बचाव पक्ष और NIA की दलीलें

अदालत ने ज़मानत याचिका पर फैसला सुनाने से पहले बचाव पक्ष और एनआईए, दोनों की दलीलों पर विचार किया। बचाव पक्ष ने आरोपी के लंबे समय से जेल में बंद होने, मुकदमे में देरी और उसके खराब स्वास्थ्य का हवाला दिया। उन्होंने दलील दी कि इंशा छह साल से अधिक समय से हिरासत में है और मुकदमे की धीमी गति से उसकी कैद अनुचित हो गई है। यह भी कहा गया कि 240 में से सिर्फ 49 गवाहों से ही पूछताछ हुई है और इस गति से मुकदमे में कई साल लग सकते हैं।

वहीं, एनआईए ने ज़मानत का पुरजोर विरोध किया। एजेंसी ने आरोपों की गंभीरता, जांच के दौरान जुटाए गए सबूतों और यूएपीए की धारा 43-डी(5) के तहत लगे प्रतिबंधों का हवाला देते हुए याचिका को खारिज करने की मांग की।

इनपुट: IANS

N

News4Social राजनीति डेस्क

News4Social राजनीति डेस्क — IANS समेत लाइसेंस-प्राप्त समाचार एजेंसियों की फीड से राजनीति और चुनाव से जुड़ी ताज़ा व प्रामाणिक खबरें संपादकीय समीक्षा के बाद प्रकाशित करता है। हर खबर उसके स्रोत के श्रेय (credit) के साथ दी जाती है। सभी लेख देखें →

आगे पढ़ें

और देखें →