रविवार, 12 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
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चीन की 'रेयर अर्थ' खदानों का ज़हरीला असर, म्यांमार से थाईलैंड तक मेकांग नदी में घुल रहा आर्सेनिक

चीन ने भले ही अपने देश में दुर्लभ खनिजों (रेयर अर्थ) के खनन पर पर्यावरणीय नियम सख़्त कर दिए हों, लेकिन इसकी भारी कीमत उसके पड़ोसी देश चुका रहे हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, चीन की बढ़ती रेयर अर्थ इंडस्ट्

चीन की 'रेयर अर्थ' खदानों का ज़हरीला असर, म्यांमार से थाईलैंड तक मेकांग नदी में घुल रहा आर्सेनिक
(फोटो: IANS)

चीन ने भले ही अपने देश में दुर्लभ खनिजों (रेयर अर्थ) के खनन पर पर्यावरणीय नियम सख़्त कर दिए हों, लेकिन इसकी भारी कीमत उसके पड़ोसी देश चुका रहे हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, चीन की बढ़ती रेयर अर्थ इंडस्ट्री ने अपना प्रदूषण फैलाने वाला काम म्यांमार जैसे देशों में भेज दिया है, जिससे मेकांग नदी में ज़हरीले पदार्थों का स्तर ख़तरनाक ढंग से बढ़ गया है। समाचार एजेंसी IANS ने म्यांमार के मिज़्ज़िमा न्यूज़ पोर्टल के हवाले से यह जानकारी दी है।

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रिपोर्ट में बताया गया है कि चीन की कंपनियाँ अब म्यांमार के काचिन और शान जैसे राज्यों से बड़े पैमाने पर खनन कर रही हैं। यह बदलाव चीन के अपने यहाँ पर्यावरण नियमों को कड़ा करने के बाद आया है। विडंबना यह है कि चीन का घरेलू पर्यावरण रिकॉर्ड तो सुधर रहा है, लेकिन उसकी फ़ैक्टरियों को ज़हरीली सामग्री की आपूर्ति सीमा पार से महज़ 50 मील की दूरी से लगातार मिल रही है।

म्यांमार में खनन और चीन को निर्यात

म्यांमार में 2021 के सैन्य तख्तापलट के बाद हालात और बिगड़ गए। नागरिक शासन के ख़त्म होने से संसाधन-संपन्न सीमावर्ती इलाके जातीय सशस्त्र समूहों के नियंत्रण में चले गए। चीनी कंपनियाँ और ख़रीददार सीधे तौर पर 'यूनाइटेड वा स्टेट आर्मी' और 'काचिन इंडिपेंडेंस आर्मी' जैसे गुटों के साथ काम करते हैं। वे इन मिलिशिया को फंड देते हैं, जो खनन से हुई कमाई का इस्तेमाल गृहयुद्ध को बढ़ावा देने में करते हैं।

आँकड़े इस भयावह तस्वीर की पुष्टि करते हैं। अकेले काचिन राज्य में खनन स्थलों की संख्या 2020 में लगभग 130 थी, जो 2024 के अंत तक बढ़कर 370 से ज़्यादा हो गई। तख्तापलट के बाद के दो सालों में म्यांमार से चीन को रेयर अर्थ का निर्यात दोगुने से भी अधिक हो गया। 2017 से 2024 के बीच हुए 4.2 अरब डॉलर के कुल निर्यात का 85% हिस्सा सेना के सत्ता में आने के बाद हुआ। 2023 तक, म्यांमार चीन के 'हेवी रेयर अर्थ' आयात का 60% से अधिक हिस्सा सप्लाई कर रहा था। यह मात्रा चीन के अपने घरेलू खनन कोटे से भी ज़्यादा थी।

मेकांग नदी में फैलता ज़हर

इसका सीधा असर मेकांग नदी पर पड़ रहा है, जो चीन से निकलकर म्यांमार, लाओस, थाईलैंड और कंबोडिया से होकर बहती है। अमेरिका के स्टिमसन सेंटर द्वारा जारी सैटेलाइट तस्वीरों ने मेकांग नदी बेसिन में 833 अवैध खदानों की पहचान की है। इनमें से 86 की पुष्टि रेयर अर्थ खनन स्थलों के रूप में हुई है।

चिंता की बात यह है कि आर्सेनिक जैसा ख़तरनाक रसायन अब मेकांग की मुख्य धारा तक पहुँच गया है। 2026 की शुरुआत में थाईलैंड के चियांग माई और चियांग राय में की गई जाँच में पहली बार सभी 23 निगरानी स्थलों पर आर्सेनिक का स्तर सुरक्षा मानकों से ज़्यादा पाया गया। आर्सेनिक, लेड और कैडमियम जैसी भारी धातुएँ नदी की तलछट में जमा होकर मछलियों और इंसानों के शरीर में पहुँच रही हैं, और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का हिस्सा बनने वाले चावल और सोयाबीन जैसी फ़सलों को भी दूषित कर रही हैं।

चीन का भू-राजनीतिक हथियार

रिपोर्ट इस बात पर भी प्रकाश डालती है कि कैसे 'रेयर अर्थ' की प्रोसेसिंग क्षमता पर चीन का वैश्विक दबदबा उसे एक भू-राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की ताक़त देता है। वह व्यापारिक विवादों के दौरान अमेरिका, जापान और यूरोपीय संघ पर दबाव बनाने के लिए इसके निर्यात को सीमित कर सकता है। वहीं, 'मेकांग रिवर कमीशन' जैसे क्षेत्रीय संगठन पड़ोसी देशों में फैल रहे प्रदूषण पर रोक लगाने में असहाय हैं, क्योंकि उनके पास नदी के ऊपरी हिस्से में चीन को किसी बदलाव के लिए मजबूर करने का अधिकार नहीं है।

इनपुट: IANS

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News4Social वायर डेस्क

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