सोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर मामला: 22 आरोपियों के बरी होने को भाई ने सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती
बहुचर्चित सोहराबुद्दीन शेख कथित फर्जी एनकाउंटर मामले में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम हुआ है। मामले में मृतक सोहराबुद्दीन के छोटे भाई नयाबुद्दीन शेख ने 21 पुलिसकर्मियों समेत सभी 22 आरोपियों को बरी करने के…
बहुचर्चित सोहराबुद्दीन शेख कथित फर्जी एनकाउंटर मामले में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम हुआ है। मामले में मृतक सोहराबुद्दीन के छोटे भाई नयाबुद्दीन शेख ने 21 पुलिसकर्मियों समेत सभी 22 आरोपियों को बरी करने के बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह याचिका 13 अगस्त को रात लगभग 10:52 बजे दायर की गई थी।
याचिका में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को प्रतिवादी बनाया गया है। सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर फिलहाल यह मामला 90 दिनों के लिए मान्य 'डिफेक्ट लिस्ट' के तहत दिखाया जा रहा है। वकील अचिंत कुमार के माध्यम से दायर इस याचिका में बॉम्बे हाईकोर्ट की खंडपीठ के 7 मई के फैसले को चुनौती दी गई है।
हाईकोर्ट ने क्यों किया था बरी?
बॉम्बे हाईकोर्ट ने दिसंबर 2018 में आए स्पेशल सीबीआई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा था, जिसमें सभी 22 आरोपियों को बरी कर दिया गया था। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि अभियोजन पक्ष कथित साजिश और हत्याओं को विश्वसनीय सबूतों के साथ साबित करने में विफल रहा है, इसलिए वह निचली अदालत के निष्कर्षों में हस्तक्षेप नहीं करेगा। गौरतलब है कि सीबीआई ने भी हाईकोर्ट को बताया था कि उसने 2018 के बरी करने के फैसले को स्वीकार कर लिया है और इसे चुनौती देने का कोई निर्णय नहीं लिया है।
क्या था पूरा मामला?
यह मामला नवंबर 2005 का है, जब सोहराबुद्दीन शेख, उनकी पत्नी कौसर बी और सहयोगी तुलसीराम प्रजापति को कथित तौर पर हैदराबाद से सांगली जा रही एक बस से अगवा कर लिया गया था। अभियोजन के मुताबिक, इसके बाद गुजरात और राजस्थान पुलिस की एक संयुक्त टीम ने अहमदाबाद के पास एक कथित फर्जी मुठभेड़ में सोहराबुद्दीन की हत्या कर दी। आरोप है कि कुछ दिनों बाद कौसर बी की भी हत्या कर उनके शव को ठिकाने लगा दिया गया। मामले के मुख्य चश्मदीद गवाह माने जाने वाले तुलसीराम प्रजापति की भी दिसंबर 2006 में गुजरात-राजस्थान सीमा पर एक अन्य कथित फर्जी मुठभेड़ में हत्या कर दी गई थी।
इनपुट: IANS



