रविवार, 20 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
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संयुक्त राष्ट्र में भारत की दो टूक: समुद्री व्यापार को भू-राजनीतिक तनाव का निशाना न बनाया जाए

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों का सम्मान करने की अपनी मांग को पुरजोर तरीके से दोहराया है। भारत ने स्पष्ट किया है कि वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही को किसी भी तरह…

संयुक्त राष्ट्र में भारत की दो टूक: समुद्री व्यापार को भू-राजनीतिक तनाव का निशाना न बनाया जाए
(फोटो: IANS)

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों का सम्मान करने की अपनी मांग को पुरजोर तरीके से दोहराया है। भारत ने स्पष्ट किया है कि वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही को किसी भी तरह के 'भू-राजनीतिक तनाव का निशाना नहीं बनना चाहिए', खासकर जब होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे अहम मार्गों पर टकराव से भारतीय जहाजों और नागरिकों को नुकसान उठाना पड़ा है।

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समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने गुरुवार को सुरक्षा परिषद की एक अनौपचारिक बैठक में यह बात कही। उन्होंने कहा, "नेविगेशन (समुद्री आवाजाही) के अधिकारों पर जबरदस्ती, धमकियों, गैर-कानूनी प्रतिबंधों या मनमाने दखल का असर नहीं पड़ना चाहिए।" हरीश ने आगे कहा, "भारत एक प्रमुख समुद्री देश है और हम एक ऐसे समुद्री क्षेत्र का पुरजोर समर्थन करते हैं जो आजाद, खुला, सुरक्षित और नियमों पर आधारित हो।"

टकराव का भारत पर असर

होर्मुज जलडमरूमध्य में हाल के घटनाक्रमों ने भारत को सीधे तौर पर प्रभावित किया है। इन रुकावटों से न सिर्फ तेल और गैस की आपूर्ति में बाधा आई है, बल्कि वैश्विक स्तर पर पेट्रोलियम की कीमतों में भी भारी उछाल आया है। पी. हरीश ने बताया कि खाड़ी और पश्चिम एशिया में आई इन बाधाओं का "ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा के मामले में दुनिया भर के क्षेत्रों पर असर पड़ता है।"

भारत ने अपने नाविकों की मौत और भारतीय-पंजीकृत जहाजों पर हमलों को लेकर ईरान और अमेरिका, दोनों के सामने अपना विरोध दर्ज कराया है। जुलाई में ईरानी हमलों में एक भारतीय नाविक की मौत हुई थी, जबकि अप्रैल में ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने भारतीय झंडे वाले दो टैंकरों पर चेतावनी के तौर पर गोलियां चलाई थीं। इसी तरह, जून में अमेरिका द्वारा एक पलाऊ-पंजीकृत जहाज पर किए गए हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत पर भी भारत ने नई दिल्ली में अमेरिकी दूतावास के समक्ष कड़ा विरोध जताया था।

समुद्री सुरक्षा और नाविकों के हित

भारत इस क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। पी. हरीश के अनुसार, भारतीय नौसेना के अभियानों की मदद से सोमवार तक 449 से ज्यादा वाणिज्यिक जहाज अदन की खाड़ी और लाल सागर से सुरक्षित गुजर चुके हैं, जिनमें 8.4 बिलियन डॉलर से ज्यादा मूल्य का माल था। लाल सागर में यह खतरा ईरान समर्थित हूती मिलिशिया द्वारा पैदा किया जा रहा है।

संघर्ष के कारण फंसे सैकड़ों भारतीय नाविकों की स्थिति पर चिंता जताते हुए हरीश ने कहा, "नाविक हमारी सामूहिक कोशिशों के केंद्र में होने चाहिए। उनकी सुरक्षा, समय पर सुरक्षित निकासी, चिकित्सा सहायता, क्रू में बदलाव और स्वदेश वापसी के लिए प्रभावी आकस्मिक योजना और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता है।" उन्होंने ड्रोन और साइबर हमलों जैसे नए खतरों से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग को भी महत्वपूर्ण बताया।

इनपुट: IANS

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