गुरूवार, 2 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
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भारत के पूर्वोत्तर में सख्ती के बाद, अब नेपाल बन रहा गांजे की तस्करी का नया गढ़

भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में गांजे की अवैध खेती और तस्करी पर कड़े सुरक्षा उपायों के कारण अब तस्करों ने अपना रास्ता बदल लिया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, नेपाल अब गांजे की तस्करी का

भारत के पूर्वोत्तर में सख्ती के बाद, अब नेपाल बन रहा गांजे की तस्करी का नया गढ़
(फोटो: IANS)

भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में गांजे की अवैध खेती और तस्करी पर कड़े सुरक्षा उपायों के कारण अब तस्करों ने अपना रास्ता बदल लिया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, नेपाल अब गांजे की तस्करी का नया केंद्र बन गया है, और बिहार इसके भारत में प्रवेश का प्रमुख मार्ग बनकर उभरा है।

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केंद्रीय एजेंसियों ने पाया है कि नेपाल के पहाड़ी इलाकों में उगाया गया बेहतर गुणवत्ता वाला गांजा बिहार के रास्ते भारत में लाया जा रहा है। यहां से इसे दक्षिण भारत और श्रीलंका के बंदरगाहों तक पहुंचाया जाता है, जहां से यह अमेरिका और यूरोप के अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भेजा जाता है।

बिहार कैसे बना तस्करी का मुख्य रास्ता

जांच एजेंसियों के अनुसार, नेपाल का सुनसरी जिला इस तस्करी का मुख्य केंद्र है। वहां से गांजे की खेप भारत-नेपाल की खुली सीमा के जरिए बिहार के अररिया और सुपौल जिलों में पहुंचाई जाती है। खुफिया ब्यूरो (आईबी) के अधिकारियों ने बताया कि इस काम में सीमा पार कराने वाले दलाल (टाउट) अहम भूमिका निभाते हैं, जो पैसे लेकर तस्करी के सामान को सुरक्षित पहुंचाने में मदद करते हैं। 1,751 किलोमीटर लंबी खुली सीमा तस्करों के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है, जहां वे निजी कारों, मोटरसाइकिलों और ट्रकों का इस्तेमाल करते हैं।

पूर्वोत्तर में क्यों आई गिरावट

अधिकारियों का कहना है कि 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने के बाद पूर्वोत्तर में सीमा सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया गया। असम, त्रिपुरा, मणिपुर, मेघालय और मिजोरम जैसे राज्यों में विकास के साथ-साथ सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने से गांजे की अवैध खेती में भारी गिरावट आई, जिसके बाद तस्करों ने नेपाल को नया ठिकाना बना लिया।

तस्करी के नेटवर्क पर एजेंसियों की नजर

नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) समेत अन्य केंद्रीय एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क पर कड़ी नजर रखे हुए हैं। अधिकारियों के मुताबिक, हालांकि नेपाल से आने वाली खेप पाकिस्तान या 'गोल्डन ट्राएंगल' से आने वाले मादक पदार्थों की तुलना में कम होती है, लेकिन यह लगातार और कई बार भेजी जाती है। हाल ही में एनसीबी ने नेपाल, भारत और श्रीलंका में सक्रिय एक अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स गिरोह का भंडाफोड़ भी किया था।

अधिकारियों ने यह भी बताया कि इस नेटवर्क का इस्तेमाल अतीत में भारतीय मुजाहिदीन जैसे आतंकी संगठनों ने पाकिस्तान से नेपाल पहुंचे आतंकियों को भारत में दाखिल कराने के लिए भी किया था। संयुक्त राष्ट्र भी भारत-नेपाल की खुली सीमा को मानव तस्करी, नकली मुद्रा और हथियारों की तस्करी के लिए संवेदनशील बता चुका है।

इनपुट: IANS

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