मंगलवार, 25 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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करीमगंज चुनाव याचिका: सुप्रीम कोर्ट ने गुवाहाटी हाईकोर्ट का फैसला पलटा, दोबारा सुनवाई का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने असम की करीमगंज लोकसभा सीट पर 2024 के चुनाव को लेकर दायर याचिका पर एक अहम फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने गुवाहाटी हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें भाजपा उम्मीदवार की…

करीमगंज चुनाव याचिका: सुप्रीम कोर्ट ने गुवाहाटी हाईकोर्ट का फैसला पलटा, दोबारा सुनवाई का आदेश
(फोटो: IANS)

सुप्रीम कोर्ट ने असम की करीमगंज लोकसभा सीट पर 2024 के चुनाव को लेकर दायर याचिका पर एक अहम फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने गुवाहाटी हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें भाजपा उम्मीदवार की जीत को चुनौती देने वाली कांग्रेस प्रत्याशी की याचिका को शुरुआती स्तर पर ही खारिज कर दिया गया था। अब इस मामले की सुनवाई गुवाहाटी हाईकोर्ट में फिर से होगी।

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समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह मामला कांग्रेस के उम्मीदवार हाफिज रशीद अहमद चौधरी द्वारा दायर की गई अपील से जुड़ा है। चौधरी ने करीमगंज सीट से भाजपा के कृपानाथ मल्लाह के निर्वाचन को चुनौती दी थी, लेकिन तकनीकी आधार पर उनकी याचिका हाईकोर्ट में खारिज हो गई थी। सोमवार को जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की सुप्रीम कोर्ट बेंच ने चौधरी की अपील स्वीकार करते हुए मामले को वापस हाईकोर्ट भेज दिया।

क्या था पूरा मामला?

2024 के लोकसभा चुनाव में करीमगंज सीट पर भाजपा के कृपानाथ मल्लाह ने कांग्रेस के हाफिज रशीद अहमद चौधरी को 18,360 वोटों के अंतर से हराया था। चौधरी ने इस नतीजे को हाईकोर्ट में चुनौती दी। अपनी चुनाव याचिका में उन्होंने धांधली, बूथ कैप्चरिंग (47 मतदान केंद्रों पर), मतदाताओं को डराना-धमकाना और रिश्वतखोरी जैसे कई गंभीर आरोप लगाए थे।

हालांकि, गुवाहाटी हाईकोर्ट ने याचिका की प्रतियों के सत्यापन (अटेस्टेशन) में खामियों का हवाला देते हुए इसे सुनवाई के शुरुआती चरण में ही खारिज कर दिया था। इसके बाद चौधरी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणियाँ

सुप्रीम कोर्ट ने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के विभिन्न प्रावधानों पर विचार किया, जिनके आधार पर याचिका खारिज की गई थी। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि याचिका की प्रतियों के सत्यापन का कोई तय प्रारूप नहीं है और हर पेज पर याचिकाकर्ता के हस्ताक्षर पर्याप्त हैं। अदालत ने यह भी माना कि 'असली प्रतिलिपि के रूप में सत्यापित' और 'असली प्रतिलिपि के रूप में प्रमाणित' जैसे वाक्यांशों का एक ही अर्थ है।

एक और आपत्ति फॉर्म-25 हलफनामे में नोटरीकरण की कमी को लेकर थी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसी किसी भी कमी के कारण पूरी चुनाव याचिका को खारिज करना अनिवार्य नहीं है। कोर्ट ने हाईकोर्ट को निर्देश दिया कि वह मूल दस्तावेजों की जांच करे और यदि वे सही हैं तो मामले पर गुण-दोष के आधार पर सुनवाई करे।

अब आगे क्या होगा?

सुप्रीम कोर्ट ने मामले को वापस गुवाहाटी हाईकोर्ट भेजते हुए यह भी साफ कर दिया है कि उसने याचिका में लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों की सत्यता पर कोई टिप्पणी नहीं की है। हाईकोर्ट अब सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार मामले पर फिर से विचार करेगा। शीर्ष अदालत ने याचिका के चार पन्ने गायब होने के आरोप को खारिज करने के हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है।

इनपुट: IANS

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News4Social राजनीति डेस्क

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