मंगलवार, 25 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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तरुण तेजपाल को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं, दो सप्ताह में आत्मसमर्पण करने का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने तहलका के पूर्व प्रधान संपादक तरुण तेजपाल को 2013 के दुष्कर्म मामले में आत्मसमर्पण से छूट देने से इनकार कर दिया है। मंगलवार को दिए अपने आदेश में शीर्ष अदालत ने तेजपाल को दो सप्ताह के…

तरुण तेजपाल को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं, दो सप्ताह में आत्मसमर्पण करने का आदेश
(फोटो: IANS)

सुप्रीम कोर्ट ने तहलका के पूर्व प्रधान संपादक तरुण तेजपाल को 2013 के दुष्कर्म मामले में आत्मसमर्पण से छूट देने से इनकार कर दिया है। मंगलवार को दिए अपने आदेश में शीर्ष अदालत ने तेजपाल को दो सप्ताह के भीतर सरेंडर करने का निर्देश दिया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, अदालत ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि उनकी दोषसिद्धि और सजा के खिलाफ अपील पर सुनवाई तभी होगी जब वे पहले आत्मसमर्पण करेंगे।

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यह मामला बॉम्बे हाईकोर्ट के 6 अगस्त के उस फैसले से जुड़ा है, जिसमें 2021 के एक निचली अदालत के फैसले को पलट दिया गया था। हाईकोर्ट ने तरुण तेजपाल को दुष्कर्म और अन्य अपराधों में दोषी ठहराते हुए 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी और उन्हें आत्मसमर्पण के लिए चार सप्ताह का समय दिया था। इसी आदेश के खिलाफ तेजपाल ने सुप्रीम कोर्ट में सरेंडर से छूट की मांग की थी।

शीर्ष अदालत में क्या हुआ?

न्यायमूर्ति आलोक आराधे की एकल पीठ ने तरुण तेजपाल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और गोवा सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की दलीलें सुनीं। सिब्बल ने तर्क दिया कि तेजपाल मुकदमे के दौरान (शुरुआती छह महीने छोड़कर) जमानत पर थे और अब एक वरिष्ठ नागरिक हैं। उन्होंने 1970 के एक कानून का हवाला देते हुए कहा कि सरेंडर से छूट की अर्जी पर अपील के साथ सुनवाई की जा सकती है।

वहीं, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इन दलीलों का विरोध किया। उन्होंने कहा कि जब तक तेजपाल आत्मसमर्पण नहीं करते, उनकी अपील पर सुनवाई नहीं हो सकती और 1970 के कानून का हवाला इस मामले में लागू नहीं होता।

अदालत का अंतिम निर्देश

दोनों पक्षों को सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने तेजपाल की याचिका खारिज कर दी। जब अदालत ने आत्मसमर्पण के लिए समय पूछा, तो कपिल सिब्बल ने दो सप्ताह का वक्त मांगा, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। अदालत ने तेजपाल को 22 सितंबर तक सरेंडर सर्टिफिकेट दाखिल करने का निर्देश दिया है। यदि यह सर्टिफिकेट समय पर दाखिल कर दिया जाता है, तो उसी दिन उनकी अपील पर गुण-दोष के आधार पर सुनवाई की जाएगी।

यह मामला नवंबर 2013 का है, जब तेजपाल की एक जूनियर महिला सहकर्मी ने उन पर गोवा के एक होटल की लिफ्ट में यौन उत्पीड़न और दुष्कर्म करने का आरोप लगाया था।

इनपुट: IANS

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News4Social नेशनल डेस्क

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