RSS प्रचारक से मारपीट मामला: मानवाधिकार आयोग ने राजस्थान सरकार को भेजा नोटिस, दो हफ़्ते में मांगी रिपोर्ट
राजस्थान के जयपुर ग्रामीण स्थित नारायणा थाने में एक RSS प्रचारक के साथ कथित पुलिस बर्बरता के मामले ने तूल पकड़ लिया है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने इस घटना का संज्ञान लेते हुए राज्य के मुख्य…
राजस्थान के जयपुर ग्रामीण स्थित नारायणा थाने में एक RSS प्रचारक के साथ कथित पुलिस बर्बरता के मामले ने तूल पकड़ लिया है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने इस घटना का संज्ञान लेते हुए राज्य के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (DGP) को नोटिस जारी किया है। समाचार एजेंसी IANS से मिली जानकारी के अनुसार, आयोग ने दोनों शीर्ष अधिकारियों से दो सप्ताह के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट (एटीआर) सौंपने को कहा है।
यह पूरा मामला राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सांभर जिला प्रचारक कृष्ण अवतार के साथ हुई कथित हिरासत में यातना से जुड़ा है। लीगल राइट्स ऑब्जर्वेटरी (LRO) के संयोजक विनय जोशी द्वारा 13 अक्टूबर को दायर एक शिकायत के आधार पर NHRC ने यह कदम उठाया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि पुलिसकर्मियों ने शनिवार रात कृष्ण अवतार को फुलेरा जाते समय अवैध रूप से हिरासत में लिया और थाने में उनके साथ गंभीर मारपीट की।
पुलिस पर लगे गंभीर आरोप
शिकायत के अनुसार, यह कथित हमला थाना प्रभारी (एसएचओ) उमराव सिंह के कहने पर हुआ, जिसमें उप-निरीक्षक ओंकार सिंह समेत पांच अन्य पुलिसकर्मी शामिल थे। आरोप है कि पुलिस ने कृष्ण अवतार के कपड़े जबरन उतरवाए, हाथ-पैर बांधकर बार-बार पीटा और उनके निजी अंगों को निशाना बनाया। शिकायत में यह भी कहा गया है कि मारपीट के दौरान वह बेहोश हो गए, लेकिन होश में आने पर भी हिंसा जारी रखी गई। घायल प्रचारक को बाद में जयपुर के सवाई मानसिंह (एसएमएस) अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
आयोग ने दिए विस्तृत जांच के निर्देश
एनएचआरसी ने इस मामले को हिरासत में हिंसा और मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन माना है। आयोग ने कहा कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिले जीवन और गरिमा के अधिकार का हनन है। आयोग ने इस तथ्य का भी संज्ञान लिया कि मामले में छह पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है, लेकिन स्पष्ट किया कि केवल विभागीय कार्रवाई पर्याप्त नहीं है और आपराधिक जांच भी आवश्यक है।
आयोग ने DGP राजीव कुमार शर्मा से कई बिंदुओं पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है, जिसमें कृष्ण अवतार को हिरासत में लेने के कारण, कानूनी प्रक्रिया का पालन, मारपीट के आरोपों की जांच और नामित पुलिस अधिकारियों की भूमिका शामिल है। इसके अतिरिक्त, थाने की सीसीटीवी फुटेज, स्टेशन डायरी और अन्य संबंधित रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने के भी कड़े निर्देश दिए गए हैं।
पीड़ित की सुरक्षा और मुआवजे पर ज़ोर
मानवाधिकार आयोग ने राज्य के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि पीड़ित को उचित चिकित्सा और पुनर्वास मिले। साथ ही, सरकार को पीड़ित, उसके परिवार और गवाहों को पूरी सुरक्षा मुहैया कराने और अंतरिम मुआवजे की संभावना पर विचार करने के लिए भी कहा गया है। आयोग ने इस मामले में प्रशासनिक और पर्यवेक्षणीय लापरवाही के लिए भी जवाबदेही तय करने का निर्देश दिया है।
इनपुट: IANS



