सोमवार, 31 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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बिहार: दलित आरक्षण पर घमासान, मीसा भारती ने चिराग और मांझी को दी सामान्य सीट से चुनाव लड़ने की चुनौती

बिहार में दलित आरक्षण के भीतर उप-वर्गीकरण के मुद्दे पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। इस विवाद के केंद्र में एनडीए के सहयोगी दल, चिराग पासवान और जीतन राम मांझी हैं, जिनके विचारों में मतभेद है। समाचार…

बिहार: दलित आरक्षण पर घमासान, मीसा भारती ने चिराग और मांझी को दी सामान्य सीट से चुनाव लड़ने की चुनौती
(फोटो: IANS)

बिहार में दलित आरक्षण के भीतर उप-वर्गीकरण के मुद्दे पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। इस विवाद के केंद्र में एनडीए के सहयोगी दल, चिराग पासवान और जीतन राम मांझी हैं, जिनके विचारों में मतभेद है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, अब इस बहस में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की सांसद मीसा भारती भी शामिल हो गई हैं और उन्होंने दोनों नेताओं को खुली चुनौती दी है।

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मीसा भारती ने चिराग पासवान और जीतन राम मांझी की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि वे आरक्षण व्यवस्था पर बहस करना चाहते हैं, तो उन्हें पहले अपनी आरक्षित सीटों से इस्तीफा देना चाहिए और सामान्य सीटों से चुनाव लड़कर दिखाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि एनडीए के सहयोगी दल पूरी तरह से भाजपा पर निर्भर हो गए हैं और उसी के निर्देशों पर काम कर रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जद(यू) और उपेंद्र कुशवाहा के भी इसी राह पर चलने की बात कही।

आरक्षण पर बंटा एनडीए

यह पूरा विवाद सत्ताधारी एनडीए के अंदर अनुसूचित जाति/जनजाति आरक्षण के भविष्य को लेकर बढ़ते मतभेदों से उपजा है। एक तरफ जहां पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी और उनके बेटे व बिहार सरकार में मंत्री संतोष कुमार सुमन आरक्षण में "कोटे के भीतर कोटा" यानी उप-वर्गीकरण की वकालत कर रहे हैं, ताकि सबसे वंचित समुदायों तक इसका लाभ पहुंच सके। वहीं, दूसरी ओर चिराग पासवान मौजूदा व्यवस्था में किसी भी तरह के बदलाव का विरोध कर रहे हैं और क्रीमी लेयर जैसे प्रस्तावों पर भी सवाल उठा चुके हैं।

भाजपा ने भी पूछे सवाल

इस बीच, बिहार सरकार में मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता लखेंद्र पासवान ने भी इस मामले पर अपनी राय रखी। उन्होंने चिराग और मांझी दोनों से सवाल किया कि जो नेता दलित और महादलित समुदायों के लिए काम करने का दावा करते हैं, उन्हें यह भी बताना चाहिए कि उनके प्रयासों से उनके अपने परिवार के बाहर कितने लोगों को फायदा मिला है। लखेंद्र पासवान ने आरक्षण पर अपनी पार्टी का रुख दोहराते हुए कहा, "अगर भाजपा है, तो आरक्षण है।"

बिहार में सत्ताधारी गठबंधन के सहयोगियों के बीच इस मुद्दे पर सार्वजनिक असहमति ने उप-वर्गीकरण और आरक्षण के ढांचे को लेकर मतभेदों को और गहरा कर दिया है। अब जबकि विपक्ष भी इस बहस में शामिल हो गया है, यह राज्य में दलित और महादलित प्रतिनिधित्व को लेकर एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनता जा रहा है।

इनपुट: IANS

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News4Social राजनीति डेस्क

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