चूरू में संत की संदिग्ध मौत: हत्या के आरोपों के बीच 50 घंटे बाद समाधि से निकाला गया शव
राजस्थान के चूरू जिले में एक संत की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। हत्या के आरोपों के बाद, प्रशासन ने संगसर गांव में संत बन्ननाथ के शव को दफनाए जाने के करीब 50 घंटे…
राजस्थान के चूरू जिले में एक संत की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। हत्या के आरोपों के बाद, प्रशासन ने संगसर गांव में संत बन्ननाथ के शव को दफनाए जाने के करीब 50 घंटे बाद उनकी समाधि से बाहर निकाला है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया गया है, जिसकी रिपोर्ट से मौत के असली कारणों का खुलासा होने की उम्मीद है।
यह पूरी कार्रवाई उप-मंडल मजिस्ट्रेट के आदेश पर तहसीलदार अंकित मिमानी की देखरेख में हुई। गुरुवार को जब शव निकाला जा रहा था, तब मौके पर मेडिकल टीम, फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की टीम और भारी संख्या में पुलिस बल मौजूद था। इस दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण भी घटनास्थल पर जमा हो गए।
क्या हैं हत्या के आरोप?
पुलिस ने इस मामले में मृतक संत के भाई की शिकायत पर सात लोगों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। हरियाणा के सिरसा जिले के निवासी हंसराज ने अपनी शिकायत में बताया कि उनके छोटे भाई बन्ननाथ ने 2004 में सांसारिक जीवन त्याग दिया था और पिछले दो साल से रावतसर स्थित बालकनाथ के आश्रम में रह रहे थे। 30 सितंबर को वह संगसर गांव आए थे।
हंसराज ने आरोप लगाया है कि उनके भाई का बालकनाथ के साथ कोई विवाद हुआ था, जिसके बाद उनकी पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। शिकायत में कहा गया है कि अपराध को छिपाने के इरादे से आरोपियों ने बिना किसी को सूचना दिए बन्ननाथ को समाधि में दफना दिया। पुलिस ने बालकनाथ, बजरंगनाथ, मुकेशनाथ, लूननाथ, लक्ष्मीनारायण और दो अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
परिवार को कैसे हुआ शक?
शिकायत के मुताबिक, बालकनाथ ने 2 अक्टूबर को हंसराज को एक सत्संग के लिए बुलाया था। जब हंसराज 4 अक्टूबर को वहां पहुंचे, तो उन्हें पता चला कि बालकनाथ उनके भाई बन्ननाथ को संगसर गांव में बजरंगनाथ के पास छोड़ आए थे और एक हफ्ते में वापस लाने की बात कही थी। इसके बाद बन्ननाथ से उनका संपर्क टूट गया, जिससे उनका शक गहरा गया।
विरोध प्रदर्शन और पुलिस की कार्रवाई
इस घटना के सामने आने के बाद इलाके में तनाव बढ़ गया और आक्रोशित ग्रामीणों ने कार्रवाई की मांग को लेकर सालसर रोड पर जाम लगा दिया। पुलिस अधिकारियों के समझाने और कार्रवाई का आश्वासन देने के बाद करीब एक घंटे बाद यातायात बहाल हो सका। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने और आगे की जांच के बाद ही मौत की वजह पूरी तरह साफ हो पाएगी।
इनपुट: IANS



