राजस्थान: 309 शहरी निकायों के लिए चुनाव कार्यक्रम का ऐलान आज, आदर्श आचार संहिता होगी लागू
राजस्थान में 309 शहरी स्थानीय निकायों के चुनाव का बिगुल बुधवार को बजने वाला है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, राज्य चुनाव आयोग आज एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में चुनाव कार्यक्रम की घोषणा करेगा, जिसके साथ ही…
राजस्थान में 309 शहरी स्थानीय निकायों के चुनाव का बिगुल बुधवार को बजने वाला है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, राज्य चुनाव आयोग आज एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में चुनाव कार्यक्रम की घोषणा करेगा, जिसके साथ ही इन शहरी क्षेत्रों में आदर्श आचार संहिता तत्काल प्रभाव से लागू हो जाएगी।
यह चुनावी प्रक्रिया राजस्थान हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में आयोजित की जा रही है। कोर्ट ने निकाय और पंचायती राज चुनावों में देरी पर चिंता जताते हुए 15 नवंबर तक चुनाव संपन्न कराने का आदेश दिया था। इसके तहत आरक्षण लॉटरी की प्रक्रिया 15 अगस्त तक पूरी कर ली गई है, जिसका विवरण स्थानीय स्वशासन विभाग ने चुनाव आयोग को सौंप दिया है।
10,000 से ज़्यादा पार्षद सीटों पर होगा मतदान
इन चुनावों में कुल 10,245 पार्षद सीटों के लिए मतदान होगा। इनमें 10 नगर निगम, 51 नगर परिषद और 248 नगरपालिकाएं शामिल हैं। पहले चरण में पार्षदों का चुनाव किया जाएगा, जिसके बाद मेयर, नगर परिषद अध्यक्ष और नगरपालिका अध्यक्षों का चुनाव होगा।
आरक्षण व्यवस्था के तहत, 10,245 वार्डों में से 1,933 ओबीसी, 1,794 अनुसूचित जाति (SC) और 395 अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित हैं। बाकी 6,123 वार्ड अनारक्षित श्रेणी में आते हैं। वहीं, मेयर और अध्यक्ष के कुल 309 पदों में से 60 ओबीसी, 50 एससी और 11 एसटी के लिए आरक्षित किए गए हैं। सभी श्रेणियों में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देते हुए कुल 3,356 सीटें उनके लिए सुरक्षित की गई हैं।
आचार संहिता का असर और सरकारी कामकाज पर रोक
आदर्श आचार संहिता लागू होने के बाद संबंधित शहरी क्षेत्रों में सरकार पर कई पाबंदियां लग जाएंगी। सरकार न तो किसी नई विकास परियोजना की घोषणा कर पाएगी और न ही कोई नया वर्क ऑर्डर जारी कर सकेगी। हालांकि, पहले से स्वीकृत और चल रहे विकास कार्यों पर कोई रोक नहीं होगी। इसके अलावा, नए प्रोजेक्ट्स के उद्घाटन और शिलान्यास समारोहों पर भी चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक रोक रहेगी।
माना जा रहा है कि आचार संहिता का असर गुरुवार से शुरू हो रहे विधानसभा के मानसून सत्र पर भी पड़ेगा। इसके कारण यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) और खेजड़ी संरक्षण जैसे प्रस्तावित विधेयकों के पारित होने की संभावना कम है। सरकार इन विधेयकों को सत्र में पेश तो कर सकती है, लेकिन चुनावी पाबंदियां हटने के बाद नवंबर में दोबारा सत्र बुलाकर विधायी प्रक्रिया पूरी करने पर विचार कर सकती है।
इनपुट: IANS



