पंजाब के स्कूलों में अब पहली कक्षा से होगी AI की पढ़ाई, देश में ऐसा करने वाला पहला राज्य बना
पंजाब की शिक्षा व्यवस्था में एक बड़े बदलाव की घोषणा की गई है। राज्य सरकार ने स्कूली पाठ्यक्रम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को एक मुख्य विषय के तौर पर शामिल करने का फैसला किया है। समाचार एजेंसी…
पंजाब की शिक्षा व्यवस्था में एक बड़े बदलाव की घोषणा की गई है। राज्य सरकार ने स्कूली पाठ्यक्रम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को एक मुख्य विषय के तौर पर शामिल करने का फैसला किया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, यह पाठ्यक्रम कक्षा 1 से लेकर 12वीं तक के सभी छात्रों के लिए चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा, जिससे पंजाब ऐसा करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है।
स्कूल शिक्षा मंत्री हरजोत बैंस ने बुधवार को इस महत्वाकांक्षी परियोजना का शुभारंभ किया। इस कार्यक्रम में दिल्ली के पूर्व शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया, शिक्षा विशेषज्ञ और विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे। हरजोत बैंस ने इस कदम को ऐतिहासिक बताते हुए कहा, "हम हरित क्रांति का नेतृत्व करने से आगे बढ़कर अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्रांति का नेतृत्व करने की ओर बढ़ रहे हैं।"
दो चरणों में लागू होगी योजना
यह पाठ्यक्रम 'सरबतडॉटएआई' (SarbatdotAI) परियोजना के तहत पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड (PSEB) द्वारा लागू किया जाएगा। पहले चरण में, सरकारी और संबद्ध निजी स्कूलों में कक्षा 8 से 12 तक के छात्रों के लिए इसे कंप्यूटर साइंस पाठ्यक्रम के हिस्से के रूप में शुरू किया जाएगा। इसके बाद दूसरे चरण में, AI शिक्षा को कक्षा 1 से 7 तक के बच्चों के लिए भी विस्तारित किया जाएगा, ताकि हर बच्चे को छोटी उम्र से ही इस आधुनिक तकनीक की जानकारी मिल सके।
भविष्य के लिए छात्रों को तैयार करने का लक्ष्य
शिक्षा मंत्री के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य छात्रों को भविष्य के लिए जरूरी कौशल से लैस करना है। उन्होंने कहा, "हम चाहते हैं कि पंजाब का हर बच्चा न केवल भविष्य की नौकरियों के लिए तैयार हो, बल्कि तकनीक आधारित दुनिया में नवाचार करने वाला और नए विचारों का सृजन करने वाला भी बने।" पाठ्यक्रम में नवाचार, नैतिक AI, उद्यमिता और जिम्मेदार डिजिटल नागरिकता जैसे विषयों पर भी जोर दिया जाएगा।
अंतरराष्ट्रीय मानकों पर आधारित पाठ्यक्रम
हरजोत बैंस ने यह भी बताया कि इस कोर्स को तैयार करने से पहले सिंगापुर, फिनलैंड, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और अमेरिका जैसे देशों की बेहतरीन शैक्षणिक प्रणालियों का अध्ययन किया गया है। इसे यूनेस्को के एथिकल एआई फ्रेमवर्क के अनुरूप बनाया गया है, ताकि छात्र AI का सुरक्षित और नैतिक उपयोग सीख सकें। छात्रों को लाइव ऑनलाइन कक्षाओं, रिकॉर्डेड लेक्चर और प्रोजेक्ट आधारित शिक्षण के माध्यम से पढ़ाया जाएगा। इस मौके पर मनीष सिसोदिया ने भी इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह छात्रों को तकनीक का नेतृत्व करने के लिए तैयार करेगा।
इनपुट: IANS



