अम्फान चक्रवात: CAG रिपोर्ट में खुलासा, ज़्यादा मदद के लिए ममता सरकार ने बढ़ा-चढ़ाकर बताया था नुकसान
पश्चिम बंगाल में 2020 में आए विनाशकारी अम्फान चक्रवात के बाद राहत और मुआवजे को लेकर ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तत्कालीन तृणमूल कांग्रेस सरकार की भूमिका पर गंभीर सवाल उठे हैं। भारत के नियंत्रक और…
पश्चिम बंगाल में 2020 में आए विनाशकारी अम्फान चक्रवात के बाद राहत और मुआवजे को लेकर ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तत्कालीन तृणमूल कांग्रेस सरकार की भूमिका पर गंभीर सवाल उठे हैं। भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि राज्य सरकार ने केंद्र से अधिक वित्तीय सहायता प्राप्त करने के लिए चक्रवात से हुए नुकसान का अनुमान बढ़ा-चढ़ाकर और अवास्तविक रूप से पेश किया था।
समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह रिपोर्ट उन 28 कैग रिपोर्टों में से एक है जिन्हें राज्य के वित्त मंत्री स्वप्न दासगुप्ता द्वारा पश्चिम बंगाल विधानसभा में पेश किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछली राज्य सरकार अपने द्वारा बताए गए अनुमानित नुकसान को सही ठहराने के लिए कोई सबूत भी पेश नहीं कर सकी, जिससे वास्तविक क्षति का आकलन करना मुश्किल हो गया।
मुआवजा वितरण में भी गंभीर खामियां
कैग ने अपनी रिपोर्ट में मुआवजा वितरण की प्रक्रिया में एक बड़ी विसंगति को उजागर किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि जून 2020 तक सरकार ने चक्रवात में पूरी तरह या आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए सभी घरों के लिए 20,000 रुपये के मुआवजे की घोषणा की थी। हालांकि, बाद में पूरी तरह से क्षतिग्रस्त घरों के लिए तो मुआवजा 20,000 रुपये ही रहा, लेकिन आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त घरों के लिए इसे बढ़ाकर 25,000 रुपये कर दिया गया। कैग ऑडिटरों द्वारा बार-बार पूछे जाने पर भी राज्य सरकार इस अजीबोगरीब फैसले का कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दे पाई।
एक ही व्यक्ति को कई बार भुगतान
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि कई मामलों में एक ही व्यक्ति को एक से अधिक बार मुआवजे का भुगतान किया गया। इस तरह की गड़बड़ियां सबसे ज्यादा चक्रवात से सर्वाधिक प्रभावित जिले दक्षिण 24 परगना में सामने आईं। इसके अलावा नदिया, पूर्वी मिदनापुर और पश्चिमी मिदनापुर जिलों में भी ऐसे मामले पाए गए। जांच में 1,44,175 लेनदेन में लाभार्थियों की सूची और बैंक ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड में दिए गए खाता नंबरों के बीच अंतर भी पाया गया, जिसमें कुल 125.07 करोड़ रुपये की राशि शामिल थी। कैग के मुताबिक, यह खामियां लाभार्थियों के चयन और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) सिस्टम में नियंत्रण की कमी को दर्शाती हैं।
गौरतलब है कि 20 मई 2020 को आए सुपर साइक्लोन अम्फान ने पश्चिम बंगाल के 16 जिलों में भारी तबाही मचाई थी, जिसमें आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 99 लोगों की जान गई थी और संपत्ति का भारी नुकसान हुआ था।
इनपुट: IANS



