शुक्रवार, 28 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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सैम पित्रोदा: दुनिया को द्वितीय विश्व युद्ध के बाद बनी व्यवस्था से आगे बढ़कर नई वैश्विक संस्थाओं की ज़रूरत

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सैम पित्रोदा ने मौजूदा वैश्विक व्यवस्था को आज की ज़रूरतों के लिए अपर्याप्त बताते हुए इसे बदलने की पुरजोर वकालत की है। समाचार एजेंसी IANS को दिए एक विशेष साक्षात्कार में…

सैम पित्रोदा: दुनिया को द्वितीय विश्व युद्ध के बाद बनी व्यवस्था से आगे बढ़कर नई वैश्विक संस्थाओं की ज़रूरत
(फोटो: IANS)

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सैम पित्रोदा ने मौजूदा वैश्विक व्यवस्था को आज की ज़रूरतों के लिए अपर्याप्त बताते हुए इसे बदलने की पुरजोर वकालत की है। समाचार एजेंसी IANS को दिए एक विशेष साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद बनीं संस्थाएँ अब काम नहीं कर रही हैं और दुनिया को एक नए वैश्विक संविधान के साथ-साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), समानता और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों के लिए नई अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की आवश्यकता है।

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पित्रोदा का मानना है कि दुनिया अब किसी एक देश के प्रभुत्व के लिए उपयुक्त नहीं रही, बल्कि इसमें कई शक्ति केंद्रों को स्वीकार करने की ज़रूरत है। उन्होंने कहा, "आज पूरी दुनिया इस बात पर लड़ रही है कि वैश्विक शक्ति अमेरिका हो या चीन... लेकिन कोई यह नहीं कह रहा कि अब दुनिया को एक ही वैश्विक शक्ति की जरूरत नहीं है।" उन्होंने आगे कहा, "आज दुनिया एक नेटवर्क की तरह जुड़ी हुई है। हमें ऐसी नई वैश्विक व्यवस्था चाहिए जहां एक नहीं, बल्कि कई वैश्विक शक्ति केंद्र हों।"

पुरानी व्यवस्था अप्रासंगिक, नई पर चर्चा नहीं

पित्रोदा के अनुसार, दुनिया एक मुश्किल दौर से गुज़र रही है क्योंकि 80 साल पुरानी व्यवस्था अब अप्रासंगिक हो चुकी है, लेकिन इसे बदलने के लिए कोई गंभीर संवाद नहीं हो रहा है। उन्होंने कहा, "दुनिया की वर्तमान व्यवस्था आखिरी बार द्वितीय विश्व युद्ध के बाद बनाई गई थी। उसी व्यवस्था से संयुक्त राष्ट्र (यूएन), विश्व बैंक, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ), विश्व व्यापार संगठन (डब्‍ल्‍यूटीओ), विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्‍ल्‍यूएचओ) और बाद में नाटो जैसे संस्थानों का जन्म हुआ। लेकिन अब वह व्यवस्था काम नहीं कर रही है।"

उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि पिछले 80 वर्षों में उभरती चुनौतियों से निपटने के लिए कोई नई वैश्विक संस्था नहीं बनाई गई। उन्होंने विशेष रूप से AI और समानता पर केंद्रित संस्थाओं की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा, "हमें एआई के लिए एक अंतरराष्ट्रीय संस्था की जरूरत है। क्या हमें समानता और न्याय पर काम करने वाली संस्था नहीं चाहिए? लेकिन इन मुद्दों पर कोई बात ही नहीं करता।"

एक वैश्विक संविधान और अफ्रीका के लिए 'मार्शल प्लान' का सुझाव

एक समाधान के तौर पर पित्रोदा ने कुछ साझा बुनियादी सिद्धांतों पर आधारित एक वैश्विक संविधान का विचार पेश किया। उन्होंने कहा, "मैं व्यक्तिगत रूप से मानता हूं कि हमें एक वैश्विक संविधान की जरूरत है... अगर हम 20 ऐसे मुद्दों पर सहमत हो जाएं, तो वही एक वैश्विक संविधान की शुरुआत होगी, जिसका पालन सभी करें।" इन मुद्दों में उन्होंने मानव विकास, जलवायु संरक्षण, अहिंसा और महिलाओं की भूमिका जैसे विषयों को शामिल किया।

इसके अलावा, पित्रोदा ने अफ्रीका के विकास के लिए एक बड़ी वैश्विक योजना बनाने की भी मांग की, ताकि भविष्य में बड़े पैमाने पर होने वाले प्रवासन को रोका जा सके। उन्होंने कहा, "हमें अफ्रीका के विकास के लिए एक वैश्विक योजना की जरूरत है। लगभग मार्शल प्लान जैसी एक बड़ी पहल अफ्रीका के लिए बनाई जानी चाहिए।"

बदलाव अवश्यंभावी, AI बन सकता है माध्यम

पित्रोदा ने कहा कि राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी के कारण यह बदलाव धीमा हो सकता है, लेकिन यह होकर रहेगा, भले ही इसमें 25 साल लग जाएं। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को इस बदलाव की शुरुआत के लिए एक बड़ा अवसर बताया। उनके शब्दों में, "मेरे हिसाब से एआई हमें दुनिया को नए तरीके से बनाने का एक अनोखा मौका देता है। एआई एक शानदार अवसर और शक्तिशाली उपकरण है।" उनका मानना है कि बदलाव के लिए शुरुआत करने का यही सही समय है।

इनपुट: IANS

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News4Social राजनीति डेस्क

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