शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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अफगानिस्तान से व्यापार रुका, पाकिस्तान के दवा निर्यात में 30% से ज़्यादा की भारी गिरावट

पाकिस्तान के दवा निर्यात में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिसकी मुख्य वजह पड़ोसी देश अफगानिस्तान के साथ व्यापार का ठप पड़ना है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में पाकिस्तान…

अफगानिस्तान से व्यापार रुका, पाकिस्तान के दवा निर्यात में 30% से ज़्यादा की भारी गिरावट
(फोटो: IANS)

पाकिस्तान के दवा निर्यात में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिसकी मुख्य वजह पड़ोसी देश अफगानिस्तान के साथ व्यापार का ठप पड़ना है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में पाकिस्तान के फार्मास्युटिकल निर्यात में मूल्य के हिसाब से 30.26% की कमी आई, और यह गिरावट चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में भी 25.53% के साथ जारी रही।

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पाकिस्तान के दवा उद्योग के लिए अफगानिस्तान हमेशा से एक सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण बाज़ार रहा है। अक्टूबर 2025 से सीमा बंद होने और व्यापारिक गतिविधियों में आई बाधाओं ने इस सेक्टर को बुरी तरह प्रभावित किया है। पाकिस्तान फार्मास्युटिकल मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (PPMA) ने इस मुद्दे को सरकार के सामने उठाया है, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका है।

निर्यात में गिरावट के आंकड़े

पाकिस्तान ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स (PBS) के आंकड़ों से स्थिति की गंभीरता का पता चलता है। वित्त वर्ष 2024-25 में जहां पाकिस्तान का दवा निर्यात 45.74 करोड़ डॉलर था, वहीं 2025-26 में यह 30.26% घटकर महज़ 31.90 करोड़ डॉलर रह गया। यह 13.84 करोड़ डॉलर की सीधी कमी है। मात्रा के हिसाब से भी निर्यात 1,12,517 मीट्रिक टन से 26.14% घटकर 83,104 मीट्रिक टन पर आ गया। यह गिरावट चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (जुलाई-सितंबर) में भी जारी रही, जब निर्यात पिछले साल की इसी अवधि के 9.84 करोड़ डॉलर की तुलना में घटकर 7.33 करोड़ डॉलर रह गया।

अफगानिस्तान पर निर्भरता और अब बदलाव

आंकड़े बताते हैं कि वित्त वर्ष 2024-25 में पाकिस्तान के कुल दवा निर्यात का लगभग 34.1% हिस्सा अकेले अफगानिस्तान का था, जिसका मूल्य 15.568 करोड़ डॉलर था। PPMA के पूर्व अध्यक्ष तौकीर उल हक ने 'द न्यूज' को बताया कि व्यापार रुकने से न केवल पाकिस्तान के खजाने को नुकसान हुआ है, बल्कि अफगानिस्तान के मरीज़ों को भी महंगी दवाएं खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। इस बीच, काबुल से मिली रिपोर्टों के अनुसार, अफगानिस्तान अब अपनी दवा आपूर्ति के लिए पाकिस्तान पर निर्भरता कम करके दूसरे देशों की ओर देख रहा है।

सीमा विवाद और तनाव की पृष्ठभूमि

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव का एक लंबा इतिहास रहा है, जिसमें डूरंड रेखा एक प्रमुख मुद्दा है। अगस्त 2021 में तालिबान के सत्ता में आने के बाद से संबंध और खराब हुए हैं। पाकिस्तान आरोप लगाता रहा है कि तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) जैसे आतंकवादी समूह सीमा पार हमलों के लिए अफगान धरती का इस्तेमाल कर रहे हैं, जबकि अफगानिस्तान इन आरोपों से इनकार करता है। अक्टूबर 2025 से सीमा पार हिंसा के बाद सीमा बंद है, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापार, आवाजाही और राजनयिक संबंधों पर गहरा असर पड़ा है।

इनपुट: IANS

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