बलूचिस्तान में फिर 'जबरन गुमशुदगी': सुरक्षा बलों पर तीन और नागरिकों को गायब करने का आरोप
पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में नागरिकों के जबरन गायब होने का सिलसिला कथित तौर पर जारी है। मानवाधिकार संगठनों ने बुधवार को पाकिस्तानी सुरक्षा बलों पर तीन और लोगों को हिरासत में लेकर अज्ञात स्थानों…
पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में नागरिकों के जबरन गायब होने का सिलसिला कथित तौर पर जारी है। मानवाधिकार संगठनों ने बुधवार को पाकिस्तानी सुरक्षा बलों पर तीन और लोगों को हिरासत में लेकर अज्ञात स्थानों पर ले जाने का आरोप लगाया है, जिससे स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ गई है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ये घटनाएँ केच और खुजदार जिलों में हुई हैं।
मानवाधिकार समूहों का कहना है कि बलूचिस्तान में पिछले कुछ समय से न्यायेतर हत्याओं और जबरन गुमशुदगी की घटनाओं में वृद्धि देखी गई है, जिससे असुरक्षा का माहौल बना हुआ है।
दो डॉक्टर और एक अन्य नागरिक लापता
बलोच नेशनल मूवमेंट के मानवाधिकार विभाग 'पांक' ने दावा किया है कि मंगलवार तड़के केच जिले के तुर्बत इलाके से दो डॉक्टरों को हिरासत में लिया गया। संगठन के अनुसार, 28 वर्षीय माहिर मजार और 28 वर्षीय जमशैर बलोच को कथित तौर पर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने उठाया था, जिसके बाद से उनका कोई पता नहीं चल सका है।
वहीं, एक अन्य मानवाधिकार संगठन 'बलोच वॉयस फॉर जस्टिस' (बीवीजे) ने आरोप लगाया है कि कादिर बख्श बलोच को 6 सितंबर को सुरक्षा बलों ने उस वक्त हिरासत में लिया जब वह बागबाना से खुजदार जा रहे थे। बीवीजे के अनुसार, यह तीसरी बार है जब कादिर बख्श को कथित तौर पर जबरन गायब किया गया है।
कानूनी प्रक्रिया और मानवाधिकारों का उल्लंघन
संगठन 'पांक' ने इस कार्रवाई को 'जबरन गुमशुदगी' और मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन बताया है। संगठन ने कहा कि किसी व्यक्ति को उसके घर से उठाकर उसकी स्थिति और ठिकाने की जानकारी छिपाना अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानूनों के खिलाफ है। यह नागरिक और राजनीतिक अधिकारों पर अंतरराष्ट्रीय वाचा के तहत मिले स्वतंत्रता, सुरक्षा और मनमानी हिरासत से संरक्षण जैसे अधिकारों का भी उल्लंघन है।
दोनों मानवाधिकार संगठनों ने पाकिस्तानी अधिकारियों से लापता नागरिकों के बारे में तत्काल जानकारी सार्वजनिक करने और उन्हें बिना शर्त रिहा करने की मांग की है। उन्होंने यह भी आग्रह किया है कि इन लोगों को उनके परिवारों और कानूनी सहायता से संपर्क करने की अनुमति दी जाए। इसके साथ ही, बलूचिस्तान में रात के समय होने वाली छापेमारी और मनमानी गिरफ्तारियों पर रोक लगाने की भी मांग की गई है।
इनपुट: IANS



