रविवार, 18 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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पाकिस्तान का थारपारकर जिला: 9 महीनों में 122 आत्महत्याएं, जानिए क्या हैं कारण

पाकिस्तान के सिंध प्रांत का थारपारकर जिला एक गंभीर मानवीय संकट से जूझ रहा है, जहां इस साल आत्महत्या की घटनाओं में चिंताजनक वृद्धि देखी गई है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी से…

पाकिस्तान का थारपारकर जिला: 9 महीनों में 122 आत्महत्याएं, जानिए क्या हैं कारण
(फोटो: IANS)

पाकिस्तान के सिंध प्रांत का थारपारकर जिला एक गंभीर मानवीय संकट से जूझ रहा है, जहां इस साल आत्महत्या की घटनाओं में चिंताजनक वृद्धि देखी गई है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी से सितंबर 2024 के बीच जिले में 122 लोगों ने अपनी जान ले ली, जिससे यह क्षेत्र गलत वजहों से सुर्खियों में आ गया है।

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लगभग 18 लाख की आबादी वाले इस विशाल जिले में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति बेहद खराब है। सात तालुकों में फैले थारपारकर के लिए स्वास्थ्य विभाग ने केवल दो प्रशिक्षित पेशेवर नियुक्त किए हैं। स्टाफ की कमी, अपर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाएं और खराब सड़कों के कारण दूर-दराज के गांवों में रहने वाले लोगों के लिए चिकित्सा या मनोवैज्ञानिक मदद पाना लगभग असंभव हो जाता है।

सूखा, गरीबी और पलायन का दुष्चक्र

थारपारकर के निवासियों की समस्याएं बार-बार पड़ने वाले सूखे के कारण और भी बढ़ जाती हैं। यहां के अधिकांश ग्रामीण परिवार अपनी आजीविका के लिए बारिश और पशुधन पर निर्भर हैं। पानी की कमी, जलवायु परिवर्तन, फसल की बर्बादी और पशुओं की मौत उन्हें आर्थिक रूप से तोड़ देती है।

इस स्थिति में, लोगों को अक्सर काम की तलाश में संघार, मीरपुरखास और बदिन जैसे सिंचित जिलों की ओर पलायन करना पड़ता है। 'द फ्राइडे टाइम्स' की रिपोर्ट के मुताबिक, इस विस्थापन से पारिवारिक और सामाजिक ताना-बाना बिखर जाता है, जो लोगों में मानसिक तनाव, असुरक्षा और भविष्य को लेकर अनिश्चितता पैदा करता है।

हर वर्ग पर गहरा असर

इस संकट का सबसे बुरा असर महिलाओं और बच्चों पर पड़ रहा है। बच्चों को गरीबी के कारण अक्सर पढ़ाई छोड़कर परिवार की मदद के लिए काम करना पड़ता है। वहीं, महिलाओं को पीने का पानी और जलावन इकट्ठा करने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। इसके अलावा, उन्हें खेतों में काम करके और कभी-कभी घरेलू हिंसा का सामना करके भी शारीरिक और मानसिक तनाव झेलना पड़ता है।

विशेषज्ञों की राय और समाधान

'द फ्राइडे टाइम्स' की रिपोर्ट में अली नवाज रहीमू के हवाले से कहा गया है कि हालांकि आत्महत्या के कई कारण हो सकते हैं, लेकिन थारपारकर में लगातार गरीबी, बेरोजगारी, पारिवारिक कलह और अपर्याप्त मानसिक स्वास्थ्य सहायता मुख्य वजहें हैं। उन्होंने कहा कि असल कारणों का पता लगाने के लिए गहन शोध की आवश्यकता है। रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि सिंध सरकार को अस्पतालों में मनोचिकित्सकों और परामर्शदाताओं की नियुक्ति करनी चाहिए और दूरदराज के इलाकों के लिए 'मोबाइल मेंटल हेल्थ टीम' शुरू करनी चाहिए। साथ ही, मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े सामाजिक कलंक को कम करने के लिए जागरूकता कार्यक्रम चलाने की भी सिफारिश की गई है।

इनपुट: IANS

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