पाकिस्तान: गेहूं के समर्थन मूल्य और कृषि सुधारों की मांग को लेकर किसानों का देशव्यापी प्रदर्शन
पाकिस्तान में बढ़ती लागत और घटती आमदनी से जूझ रहे छोटे किसानों ने देशभर में प्रदर्शन कर सरकार से तत्काल राहत देने की मांग की है। 'पाकिस्तान किसान राब्ता कमेटी' (पीकेआरसी) के बैनर तले हुए इन…
पाकिस्तान में बढ़ती लागत और घटती आमदनी से जूझ रहे छोटे किसानों ने देशभर में प्रदर्शन कर सरकार से तत्काल राहत देने की मांग की है। 'पाकिस्तान किसान राब्ता कमेटी' (पीकेआरसी) के बैनर तले हुए इन प्रदर्शनों में किसानों ने गेहूं का समर्थन मूल्य 5,000 पाकिस्तानी रुपये (पीकेआर) प्रति मन तय करने और व्यापक कृषि सुधार लागू करने पर जोर दिया। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, किसानों का कहना है कि वे आर्थिक रूप से टूटने की कगार पर हैं।
प्रदर्शनकारियों ने अपनी बिगड़ती आर्थिक स्थिति के लिए कई कारणों को जिम्मेदार ठहराया। उनका कहना है कि उर्वरक, डीजल, बिजली और बीजों की कीमतें आसमान छू रही हैं, जबकि उनकी फसलों से होने वाली आय लागत को भी पूरा नहीं कर पा रही है। इस आर्थिक संकट ने ग्रामीण इलाकों में खेती को मुश्किल बना दिया है।
प्रमुख मांगें और सरकारी नीतियां
किसानों ने अपनी मांगों में एक मजबूत सरकारी खरीद प्रणाली स्थापित करने पर जोर दिया ताकि उन्हें बिचौलियों और बड़े व्यापारिक समूहों के शोषण से बचाया जा सके। इस संदर्भ में, उन्होंने 'पाकिस्तान एग्रीकल्चरल स्टोरेज एंड सर्विसेज कॉरपोरेशन' (पीएएसएससीओ) को तत्काल बहाल करने की भी मांग की। 'डॉन' की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया गया है कि किसानों ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) और विश्व बैंक की आर्थिक नीतियों का भी विरोध किया। उनका मानना है कि ये नीतियां बाजार को अनियंत्रित रूप से खोलने और सरकारी कृषि संस्थानों को कमजोर करने का काम कर रही हैं।
खाद्य सुरक्षा पर मंडराता संकट
यह विरोध प्रदर्शन ऐसे समय में हो रहा है जब पाकिस्तान में रबी सीजन की शुरुआत हो चुकी है और गेहूं की खेती कई चुनौतियों से घिरी है। रिपोर्टों के अनुसार, गेहूं उत्पादन की लागत बढ़कर 3,761 पीकेआर प्रति मन तक पहुंच गई है, और पानी की कमी से सिंचाई पर भी असर पड़ रहा है। पीकेआरसी के अध्यक्ष तारिक महमूद और महासचिव रिफत मकसूद ने कहा कि छोटे किसान आर्थिक रूप से तबाह होने की स्थिति में हैं। संगठन के संघीय समिति सदस्य फारूक तारिक ने कहा कि देश की खाद्य सुरक्षा का रास्ता वास्तविक कृषि सुधारों से होकर गुजरता है, जिसमें भूमिहीन किसानों को जमीन देना, पानी का उचित वितरण और स्थानीय बीजों को बढ़ावा देना शामिल है।
'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी गेहूं भंडार की अनिश्चित स्थिति और सरकार द्वारा अब तक 'संकेतात्मक मूल्य' की घोषणा न किए जाने से किसानों की चिंताएं और बढ़ गई हैं। 'पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ' (पीटीआई) किसान विंग के केंद्रीय सूचना सचिव खालिद नवाज सधराइच ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने तत्काल कदम नहीं उठाए तो कृषि संकट और गहरा सकता है, जिसका सीधा असर देश के खाद्य उत्पादन पर पड़ेगा।
इनपुट: IANS



